किसानों पर संकट: सुप्रीम कोर्ट में पीली मटर आयात पर बैन की मांग, केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली। किसानों के हितों से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। किसान महापंचायत संस्था की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि पीली मटर (Yellow Peas) के आयात पर रोक लगाई जाए, क्योंकि यह भारतीय किसानों की आमदनी पर प्रतिकूल असर डाल रही है।

किसानों का तर्क – नुकसानदेह है पीली मटर का आयात

याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा कि पीली मटर का आयात करीब 35 रुपये प्रति किलो की दर से हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस दाल को आयात-शुल्क से भी मुक्त कर दिया गया है, जिसकी वजह से भारतीय किसान अपनी दालें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी कम दामों पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

भूषण ने अदालत को बताया, “भारत में उगाई जाने वाली अरहर, मूंग और उड़द जैसी दालों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 85 रुपये प्रति किलो है, लेकिन पीली मटर की सस्ती उपलब्धता से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।”

सरकारी संस्थाओं की रिपोर्ट का हवाला

भूषण ने आगे कहा कि कृषि मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति और नीति आयोग सहित कई संस्थाओं ने पीली मटर के आयात को रोकने की सिफारिश की है। इतना ही नहीं, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने भी मार्च 2025 में सुझाव दिया था कि पीली मटर पर प्रतिबंध लगाया जाए और अन्य दालों पर आयात शुल्क बढ़ाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी – उपभोक्ताओं का भी ध्यान रखना होगा

मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच कर रही थी, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस सूर्य कांत ने की। उन्होंने कहा,
“आपने आधिकारिक और जिम्मेदार संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला दिया है, इसलिए हम नोटिस जारी कर रहे हैं। लेकिन हमें देखना होगा कि घरेलू उत्पादन पर्याप्त है या नहीं। अगर आयात रोक दिया गया और उत्पादन कम हुआ तो उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं के हितों को संतुलित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यदि घरेलू उत्पादन घटा तो दालें महंगी होंगी।

पौष्टिकता को लेकर सवाल

सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि ऑस्ट्रेलिया में पीली मटर का इस्तेमाल मवेशियों के चारे के रूप में किया जाता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक साबित हो सकती है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या इस दाल की पौष्टिकता पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन हुआ है। भूषण ने जवाब दिया कि उनकी जानकारी के मुताबिक यह दाल स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।

 

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