उत्तर प्रदेश की पहचान अब सिर्फ एक कृषि प्रधान राज्य तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से भारत के एक बड़े ‘एक्सपोर्ट पावरहाउस’ के रूप में तब्दील हो रहा है. योगी सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना और नई ‘निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30’ ने प्रदेश की तस्वीर बदल कर रख दी है. इन नीतियों का ही असर है कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पाद अब सात समंदर पार विदेशी बाजारों में अपनी चमक बिखेर रहे हैं और ‘मेक इन यूपी’ एक ग्लोबल ब्रांड बनने की राह पर है.
आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश का निर्यात करीब 21 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है. इस सफलता से उत्साहित होकर राज्य सरकार ने साल 2030 तक 50 बिलियन डॉलर के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. नीति आयोग के ‘निर्यात तैयारी सूचकांक 2024’ (EPI) में भी यूपी ने लंबी छलांग लगाई है. प्रदेश ने देश भर में चौथा स्थान हासिल किया है, जबकि लैंडलॉक्ड (समुद्र तट से दूर) राज्यों की श्रेणी में इसे दूसरा स्थान मिला है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.
वैश्विक मंच पर उत्तर प्रदेश के कई उत्पादों ने अपनी बादशाहत कायम कर ली है. नॉएडा और ग्रेटर नोएडा अब इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के बड़े गढ़ बन चुके हैं, जहां देश के कुल मोबाइल उत्पादन का लगभग 40 फीसदी हिस्सा तैयार होता है. वहीं, भदोही की कालीन और मुरादाबाद के पीतल के बर्तनों की मांग अमेरिका और यूरोप के देशों में लगातार बढ़ रही है. इसी तरह, कानपुर और आगरा का चमड़ा उद्योग इटली और जर्मनी जैसे फैशन हब की जरूरतों को पूरा कर रहा है. कृषि क्षेत्र में भी सिद्धार्थनगर का मशहूर ‘काला नमक चावल’ और पश्चिमी यूपी के रसीले आम अब खाड़ी देशों के सुपरमार्केट में अपनी जगह बना चुके हैं.
निर्यातकों की राह आसान करने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे और नीतियों में बड़े बदलाव किए हैं. नई निर्यात नीति (2025-30) के तहत एमएसएमई (MSME) इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन हासिल करने पर 75 फीसदी तक की सब्सिडी दी जा रही है. इसके अलावा, अमेज़न और वॉलमार्ट जैसी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ समझौता कर कारीगरों को सीधे ग्लोबल मार्केट से जोड़ा गया है. जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क के विकास से निर्यात की गति को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हो रहा यह बदलाव न सिर्फ विदेशी मुद्रा ला रहा है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे भी खोल रहा है.