कोर्ट का आदेश रद्दी की टोकरी में? पुलिसवालों पर FIR नहीं होने पर भड़के अखिलेश यादव, संभल पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

उत्तर प्रदेश के संभल में पुलिस और न्यायपालिका के आदेशों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है. संभल की सीजेएम कोर्ट ने हाल ही में दो अलग-अलग और गंभीर मामलों में पुलिसकर्मियों के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था. हालांकि, कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद अब तक आरोपी पुलिसकर्मियों पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. इसी रवैये को लेकर अब सियासत गरमा गई है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ट्वीट करते हुए संभल पुलिस की कार्यशैली पर तीखा निशाना साधा है और कानून के राज पर सवाल उठाए हैं.

कोर्ट के आदेश की अवहेलना का पहला मामला बदायूं निवासी ओमवीर से जुड़ा है. संभल पुलिस ने ओमवीर को लुटेरा बताते हुए एक मुठभेड़ में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. लेकिन पुलिस की यह कहानी तब झूठी साबित हो गई जब यह तथ्य सामने आया कि जिस वक्त पुलिस ने ओमवीर को लूट की वारदात में शामिल दिखाया था, उस वक्त वह किसी अन्य मामले में पहले से ही जेल की सलाखों के पीछे था. पुलिस के इस फर्जीवाड़े पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने थाना अध्यक्ष समेत 19 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था. हैरानी की बात यह है कि इस आदेश को 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन संभल पुलिस ने अपने ही विभाग के लोगों पर अब तक कोई केस दर्ज नहीं किया है.

दूसरा मामला संभल हिंसा के दौरान आलम नामक युवक को गोली लगने का है. आलम के पिता के मुताबिक, उनका बेटा 24 नवंबर 2024 को ठेले पर बिस्किट बेच रहा था, तभी पुलिस की मौजूदगी में हुई फायरिंग में उसे गोली लग गई. अधिकारियों से न्याय न मिलने पर पीड़ित परिवार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के बाद सीजेएम कोर्ट ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और 15-20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संभल के एसपी ने पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने से इनकार करते हुए कहा है कि वे इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे. बता दें कि संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की इस हिंसा में पांच लोगों की जान गई थी.

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