UP Politics: कल्याण सिंह के पोते को CM बनाने की मांग से गरमाई सियासत, BJP सांसद के बयान ने बढ़ाई हलचल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नई चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद साक्षी महाराज के बयान के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। कासगंज में आयोजित अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा के कार्यक्रम में लोधी समाज को सरकार और संगठन में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग उठी, वहीं मंच से बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह को मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी सामने आई।

लोधी समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि लोधी समाज लंबे समय से भाजपा के साथ खड़ा रहा है और उसे राजनीतिक भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब से भाजपा का गठन हुआ है तब से यह समाज पार्टी के साथ जुड़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले बीजेपी को शहरों की पार्टी कहा जाता था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के कारण पार्टी जन-जन तक पहुंची और व्यापक जनाधार बना।

साक्षी महाराज ने कही भागीदारी बढ़ाने की बात

साक्षी महाराज ने कहा कि लोधी समाज राष्ट्रवादी सोच वाला समाज है, लेकिन आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को राज्यसभा, एमएलसी, राज्यपाल और मुख्यमंत्री जैसे पदों पर अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज किसी प्रकार का दबाव नहीं बना रहा, बल्कि पार्टी नेतृत्व को यह संदेश देना चाहता है कि लोधी समाज का सम्मान बनाए रखना जरूरी है।

संदीप सिंह को मुख्यमंत्री बनाने की उठी मांग

कार्यक्रम के दौरान मंच से उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग भी उठी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साक्षी महाराज ने कहा कि संदीप सिंह और राजवीर सिंह के मन में ऐसी कोई इच्छा नहीं है, लेकिन समाज चाहता है कि योग्य व्यक्ति को नेतृत्व का अवसर मिले।

विपक्ष पर भी साधा निशाना

साक्षी महाराज ने समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पीडीए की कोई लहर नहीं है और बीजेपी, योगी और मोदी का कोई विकल्प नहीं है।

यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज के हितों की चिंता यदि किसी ने की है तो वह बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने की है। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय इसी सरकार ने लिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के बाद आगामी चुनावी समीकरणों और सामाजिक प्रतिनिधित्व की राजनीति को लेकर प्रदेश में नई बहस शुरू हो सकती है।

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