उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गौतमबुद्ध नगर के दादरी में आयोजित सपा की विशाल रैली के बाद भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने रैली में उमड़ी भारी भीड़ का जिक्र करते हुए कहा कि जनता के उत्साह ने खुद साबित कर दिया कि ‘आये हुए’ और ‘लाये हुए’ लोगों में क्या अंतर होता है।
रविवार को आयोजित इस जनसभा को समाजवादी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत के रूप में पेश किया। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि इस कार्यक्रम की तैयारी पिछले दो महीनों से लगातार की जा रही थी, जिसके चलते आसपास के गांवों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग रैली में पहुंचे।
2027 चुनाव की शुरुआत नोएडा से
समाजवादी पार्टी ने इस बार 2027 विधानसभा चुनाव का राजनीतिक आगाज नोएडा क्षेत्र से किया है। दादरी में आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से सपा नेतृत्व उत्साहित नजर आया। कार्यक्रम स्थल पर भीड़ इतनी अधिक थी कि कई लोग मैदान के बाहर सड़कों पर ही खड़े रहे।
अखिलेश यादव ने रैली की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा —
‘दादरी एक शानदार शुरुआत है.. अब होना PDA का इंक़लाब है. ‘दादरी रैली’ में जो लोग दूर-दूर से आए, उनका समर्थन और उत्साह अभूतपूर्व रहा. सभी आगंतुकों और आयोजकों को ऐसे ऐतिहासिक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई और हृदय से धन्यवाद-शुक्रिया!
जनता के जोश ने साबित कर दिया कि ‘आये हुए’ और ‘लाये हुए’ के बीच क्या अंतर होता है. जो हजारों लोग मैदान भर जाने के कारण अंदर नहीं आ पाये और बाहर सड़कों पर ही रह गये, उनको मेरा विशेष धन्यवाद।’
भाजपा पर बिना नाम लिए साधा निशाना
रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बिना भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस रैली ने कई लोगों के होश उड़ा दिए और कुछ को अपनी रैली करने के लिए मजबूर कर दिया।
उन्होंने कहा, “इस रैली ने न जाने कितने लोगों के न केवल होश उड़ा दिए बल्कि उन्हें रैली के लिए मजबूर कर दिया. कल (शनिवार) भी रैली हुई थी, जिसमें लोगों को मजबूर करके लाया गया.”
सपा प्रमुख ने आगे तंज कसते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली पार्टी को सरकारी कर्मचारियों का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब ऐसा दौर है जहां कैमरे से कुछ भी छिप नहीं सकता और उस रैली में लोग खुद नहीं आए थे बल्कि लाए गए थे।
राजनीतिक संदेश और चुनावी संकेत
दादरी रैली को राजनीतिक विश्लेषक आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतिक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। सपा की ओर से भीड़ के जरिए शक्ति प्रदर्शन का संदेश देने की कोशिश की गई, जबकि भाजपा पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी साफ नजर आई।