राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में रविवार को मौसम का अचानक बदला मिजाज लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आया। नौतपा के तीसरे दिन भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को तेज बारिश और ठंडी हवाओं से राहत मिली, लेकिन तेज आंधी ने कई जगह भारी नुकसान पहुंचा दिया। मांडल क्षेत्र में BSNL का टॉवर गिर गया, जबकि उप जिला चिकित्सालय का मुख्य प्रवेश द्वार भी ढह गया। राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।
तेज हवाओं के सामने नहीं टिक पाया BSNL टॉवर
मांडल उपखंड कार्यालय परिसर में कई वर्षों से स्थापित BSNL टॉवर तेज आंधी का दबाव सहन नहीं कर सका और अचानक जमीन पर गिर पड़ा। टॉवर पास स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के भवन पर जा गिरा, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
घटना के समय आसपास लोगों की आवाजाही जारी थी और नजदीक स्थित एक भोजनालय पर भी कई लोग मौजूद थे। हालांकि, संयोगवश कोई भी इसकी चपेट में नहीं आया और बड़ा हादसा टल गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि टॉवर के रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी जांच में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई।
अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार भी हुआ धराशायी
आंधी का असर मांडल उप जिला चिकित्सालय में भी देखने को मिला। तेज हवाओं के चलते अस्पताल का मुख्य गेट और उससे जुड़ी दीवारें अचानक गिर गईं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हालांकि, इस हादसे में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और भवनों की मजबूती को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
विदाई समारोह की तैयारियां भी हुईं प्रभावित
मांडल थाना परिसर में प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी Ashish Shrotriya के विदाई समारोह की तैयारियां भी तेज आंधी की वजह से प्रभावित हो गईं।
कार्यक्रम के लिए लगाए गए टेंट, तंबू और अन्य अस्थायी ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे आयोजन की तैयारियों को झटका लगा।
कई इलाकों में पेड़ गिरे, बिजली आपूर्ति हुई बाधित
आंधी और बारिश का असर केवल सरकारी परिसरों तक सीमित नहीं रहा। क्षेत्र के कई हिस्सों में पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं।
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे शुरू कर दिया है और संबंधित विभागों को मरम्मत कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर उठे सवाल
मांडल में हुए इन घटनाक्रमों के बाद सार्वजनिक ढांचों के रखरखाव और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि पुराने ढांचों और महत्वपूर्ण संस्थानों की नियमित जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।