UP Industrial Boost: फतेहपुर-अयोध्या को बड़ा तोहफा, UPSIDA का बजट दोगुना; नए Industrial Areas को मिली मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) की 51वीं बोर्ड बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग दोगुने बजट को मंजूरी दी गई। इस फैसले से प्रदेश में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, आधारभूत ढांचे के विस्तार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग तथा यूपीसीडा बोर्ड के अध्यक्ष आलोक कुमार ने की। बैठक में औद्योगिक विकास, निवेश प्रोत्साहन, प्रशासनिक सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

फतेहपुर और अयोध्या के औद्योगिक क्षेत्रों को मिली मंजूरी

बोर्ड ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण और भूमि खरीद से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसी क्रम में फतेहपुर की कताई मिल, संधिनावा औद्योगिक क्षेत्र और अयोध्या के त्रिशुंडी औद्योगिक क्षेत्र के ले-आउट मानचित्रों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

इस निर्णय के बाद इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध औद्योगिक विकास, भूखंडों का बेहतर नियोजन तथा सड़क, बिजली, जलापूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में तेजी आने की संभावना है। साथ ही भूमि आवंटन प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और तेज बनाया जाएगा, जिससे निवेशकों को सुविधा मिलेगी।

आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी जोर

बैठक में यूपीसीडा के क्षेत्रीय कार्यालयों तथा निर्माण एवं विद्युत खंडों की आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए 10 लाख रुपये तक की आकस्मिक निधि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में मरम्मत और रखरखाव के कार्य समय पर पूरे किए जा सकेंगे।

इसके अलावा, यूपीसीडा की आवासीय योजनाओं के पात्र आवंटियों को 7 नवंबर 2026 तक विलंब शुल्क के साथ लीज डीड निष्पादित कराने का अंतिम अवसर दिया गया है। तय समय सीमा के बाद लीज डीड नहीं कराने वाले आवंटियों का आवंटन स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा।

बंद उद्योगों को दोबारा शुरू करने की नई नीति बनेगी

बोर्ड बैठक में लंबे समय से बंद औद्योगिक इकाइयों के पुनर्जीवन के लिए नई नीति तैयार करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। नई व्यवस्था के तहत नो-ड्यूज प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुकी और विभिन्न कारणों से बंद हुई औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित शर्तों के अनुसार दोबारा संचालन का अवसर दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे निष्क्रिय औद्योगिक परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी होगी।

औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति

दोगुने बजट के माध्यम से प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, जलापूर्ति, ड्रेनेज और अन्य आधारभूत सुविधाओं के निर्माण, विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे निवेशकों को बेहतर औद्योगिक अवसंरचना उपलब्ध होगी और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी।

बैठक को संबोधित करते हुए यूपीसीडा बोर्ड के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि बढ़ा हुआ बजट, निवेशक-अनुकूल नीतियां और योजनाबद्ध औद्योगिक विकास प्रदेश को निवेश, विनिर्माण और रोजगार सृजन का राष्ट्रीय ग्रोथ इंजन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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