देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से संसद ने ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी है। मंगलवार (4 अगस्त) को राज्यसभा ने भी इस विधेयक को पारित कर दिया। इससे पहले 31 जुलाई को लोकसभा इस बिल को मंजूरी दे चुकी थी। अब इस संशोधन के लागू होने के बाद देर से जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराना पहले की तुलना में अधिक सख्त प्रक्रिया के तहत होगा।
राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में बदलाव कर देरी से होने वाले पंजीकरण की व्यवस्था को और कड़ा बनाना है, ताकि जन्म और मृत्यु की घटनाओं की समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिल सके।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति मिलने के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे देर से होने वाले पंजीकरण पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनेंगे।
दो साल से अधिक देरी होने पर क्या होगा?
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो अब उसके पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश अनिवार्य होगा। इसके साथ ही संबंधित सक्षम प्राधिकारी पंजीकरण की अनुमति देने से पहले उपलब्ध कराई गई जानकारी की प्रामाणिकता की जांच भी करेगा। मंत्री के जवाब के बाद राज्यसभा ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी।
लोकसभा से पहले ही मिल चुकी थी मंजूरी
इससे पहले 31 जुलाई को लोकसभा ने भी इस विधेयक को पारित कर दिया था। हालांकि, उस दौरान विपक्षी दलों ने इसे महत्वपूर्ण विधेयक बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई और नारेबाजी की। हंगामे के बीच विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा हुई, जिसके बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सरकार की ओर से जवाब दिया और विधेयक पारित हो गया।