IPS vs CAPF: Supreme Court पहुंचा बड़ा विवाद, शीर्ष पदों पर IPS नियुक्ति को चुनौती, केंद्र से मांगा जवाब

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के करीब 900 ग्रुप-ए अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने CAPF (General Administration) Act, 2026 को चुनौती देते हुए दावा किया है कि नया कानून शीर्ष पदों पर केवल भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की नियुक्ति का रास्ता खोलता है, जिससे CAPF अधिकारियों के प्रमोशन के अवसर सीमित हो रहे हैं।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह नया कानून वर्ष 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की भावना को कमजोर करता है, जिसमें केंद्र सरकार को CAPF में IPS अधिकारियों की डेप्यूटेशन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से कम करने और CAPF कैडर के अधिकारियों को बेहतर पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नए कानून के जरिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के वरिष्ठ नेतृत्व वाले पदों पर एक बार फिर IPS अधिकारियों का वर्चस्व स्थापित किया जा रहा है। इससे CAPF के अपने अधिकारियों के करियर ग्रोथ और पदोन्नति की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का 2025 का फैसला?

मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि CAPF कैडर के अधिकारी ‘संगठित ग्रुप ए सेवा’ (OGAS) का हिस्सा हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो वर्षों के भीतर आईजी (Inspector General) स्तर तक IPS अधिकारियों की डेप्यूटेशन को धीरे-धीरे कम करे। इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

नए कानून में क्या है प्रावधान?

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में CAPF (General Administration) Act, 2026 लागू किया। इस कानून की धारा 3 के तहत CAPF के शीर्ष नेतृत्व वाले कई पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार डायरेक्टर जनरल (DG) और स्पेशल डायरेक्टर जनरल (Special DG) के सभी पद, अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के कम से कम 67 प्रतिशत पद तथा महानिरीक्षक (IG) के 50 प्रतिशत पद IPS अधिकारियों की डेप्यूटेशन के लिए निर्धारित किए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?

याचिका दायर करने वाले अधिकारियों, जिनमें वीरता पुरस्कार प्राप्त अधिकारी और महिला अधिकारी भी शामिल हैं, का कहना है कि नया कानून सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय को प्रभावहीन बनाता है और संविधान के मूल ढांचे के विपरीत है। उनका यह भी तर्क है कि CAPF कैडर के अधिकारियों को अपने पहले बड़े प्रमोशन के लिए 15 से 18 वर्ष तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनके मनोबल और सेवा में उत्साह पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

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