उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या टाले जाएंगे, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच अपनादल (कमेरावादी) की नेता और सिराथू से समाजवादी पार्टी विधायक डॉ. पल्लवी पटेल ने बड़ा दावा करते हुए राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार चुनावी हार की आशंका के कारण पंचायत चुनाव आगे बढ़ाना चाहती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर साधा निशाना
डॉ. पल्लवी पटेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के खिलाफ माहौल बन चुका है, जिसकी वजह से चुनाव टालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘गांव-कस्बों में सरकार के खिलाफ माहौल देखकर जिला पंचायत चुनाव टाले जा रहे हैं, हार का डर और विधानसभा चुनाव पर असर की चिंता साफ दिखती है.’
विधानसभा चुनाव पर असर की आशंका
प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव जमीनी स्तर की राजनीति को दर्शाते हैं और गांव-कस्बों में बढ़ती नाराजगी सरकार के लिए चिंता का कारण बन गई है। उनके अनुसार, सरकार को डर है कि पंचायत चुनाव में संभावित हार का असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी से सरकार की मंशा स्पष्ट दिखाई देती है।
विपक्ष के लगातार आरोप
पंचायत चुनाव को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और स्थानीय मुद्दों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ा है। उनका कहना है कि यदि जिला पंचायत चुनाव में सत्ताधारी दल या उसके समर्थित उम्मीदवारों को हार मिलती है, तो इसका राजनीतिक असर विधानसभा चुनावों तक जा सकता है।
गुटबाजी और राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में
विपक्ष की ओर से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं की ताकत दिखाने की कोशिशें भी चुनाव टालने की एक वजह हो सकती हैं, जिससे भविष्य में गुटबाजी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन पल्लवी पटेल के बयान के बाद राज्य की सियासत में बहस तेज हो गई है।