उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर की पारंपरिक जहूराबाद सीट छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है।
दिलचस्प बात यह है कि अतरौलिया सीट एनडीए के सहयोगी दल निषाद पार्टी से जुड़ी मानी जाती है, जिससे गठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मुख्यमंत्री को दी फैसले की जानकारी
ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि उन्होंने अपने चुनावी फैसले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दे दी है। माना जा रहा है कि सुभासपा पिछले कुछ समय से आजमगढ़ क्षेत्र में संगठन मजबूत करने में जुटी हुई है और पार्टी को यहां दलित तथा पिछड़े वर्गों का समर्थन मिल रहा है।
राजभर ने कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग समझते हैं कि उनका हित किसके साथ है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यकों में सरकार के कामों को लेकर भरोसा बढ़ा है और सवर्ण समाज का भी समर्थन मिल रहा है। उनके मुताबिक उनकी पार्टी केवल पीडीए की राजनीति की बात नहीं करती बल्कि सभी वर्गों के साथ मजबूती से खड़ी है।
अतरौलिया सीट का सियासी गणित
आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। अतरौलिया विधानसभा सीट पर मुस्लिम और यादव वोट बैंक चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाता है। पिछले तीन चुनावों से यहां समाजवादी पार्टी लगातार जीत दर्ज कर रही है।
2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने सपा के बलराम यादव को हराया था। इसके बाद 2012 में बलराम यादव ने अपने बेटे संग्राम यादव को मैदान में उतारा और सपा ने जीत हासिल की। 2017 में भी संग्राम यादव को टिकट मिला और उन्होंने 74,276 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी के कन्हैयालाल निषाद दूसरे स्थान पर रहे।
2012 के आंकड़ों के अनुसार अतरौलिया में कुल 3,23,579 मतदाता हैं, जिनमें 1,76,670 पुरुष और 1,46,899 महिला मतदाता शामिल हैं।
जहूराबाद सीट का राजनीतिक महत्व
गाजीपुर की जहूराबाद सीट पूर्वांचल की अहम राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। यहां दलित और राजभर समुदाय के वोट सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं, जो चुनाव परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीट पर करीब 75 हजार दलित, 66 हजार राजभर, 44 हजार यादव, 34 हजार चौहान, 28 हजार मुस्लिम और लगभग 15 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं।
यह सीट पहले सपा और बसपा का गढ़ रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुभासपा ने यहां मजबूत पकड़ बनाई है। ओम प्रकाश राजभर ने 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनाव इसी सीट से जीते थे। 2017 में उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा, जबकि 2022 में सपा के साथ थे और 2023 में फिर से एनडीए में शामिल हो गए।
पूर्वांचल की राजनीति पर पड़ेगा असर
राजभर के अतरौलिया से चुनाव लड़ने के ऐलान को पूर्वांचल की राजनीति में बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल सीट बदलने का नहीं बल्कि नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश भी हो सकता है, जिसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।