लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने साढ़े आठ साल (2017-2025) के कार्यकाल का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने न केवल अपनी सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा दिया, बल्कि 1947 से 2017 तक विपक्षी दलों के शासनकाल की नाकामियों पर भी जमकर निशाना साधा।
1947 से 2017 तक का ढांचा अधूरा और निवेश ठहरा रहा
सीएम योगी ने कहा कि आज विपक्ष जिस “विजन” की बात करता है, वह 70 साल के उनके शासनकाल में अधूरा ही रहा। उस समय प्रदेश में केवल 2 एक्सप्रेसवे थे, राष्ट्रीय राजमार्ग 12,000 किमी से कम थे, हवाई अड्डों की संख्या बेहद सीमित थी और ग्रामीण व औद्योगिक कनेक्टिविटी के लिए कोई नीति नहीं थी। औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो चुका था और व्यापारी-उद्यमी हफ्ता वसूली से परेशान रहते थे।
परंपरागत उद्योगों को मिला नया जीवन
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने बिना भेदभाव के परंपरागत उद्योगों को बढ़ावा दिया, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी से जोड़ा और टूलकिट उपलब्ध कराए। उन्होंने विपक्ष के “पीडीए” (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे को जनता को गुमराह करने वाला करार देते हुए कहा कि वास्तविक काम उनकी सरकार ने किया है।
जल-थल-नभ कनेक्टिविटी में देश में अव्वल
सीएम योगी के अनुसार 2017 में जहां पूंजीगत व्यय ₹69,789 करोड़ था, वहीं 2025 में यह ₹1,47,719 करोड़ हो गया। एक्सप्रेसवे की संख्या 2 से बढ़कर 22 हो गई, जिनमें 7 संचालित, 5 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। यूपी में देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और हवाई अड्डों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जिनमें 5 निर्माणाधीन और 5 अंतरराष्ट्रीय हैं। जेवर एयरपोर्ट का निर्माण अंतिम चरण में है।
औद्योगिक विकास में रिकॉर्ड निवेश
योगी ने कहा कि 8 वर्षों में 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, जिनमें से 15 लाख करोड़ की परियोजनाएं धरातल पर उतरीं और 60 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी मिली। पंजीकृत कारखानों की संख्या 14,169 से बढ़कर 27,295 हो गई। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना से 77 जीआई टैग वाले उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली।
विदेशी निवेश और व्यापार में नई ऊंचाई
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2017 से अब तक ₹16,316 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है, जबकि 2000 से 2017 के बीच यह केवल ₹3,303 करोड़ था। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 2024 में 500 से अधिक देशी-विदेशी ट्रेडर्स ने भाग लिया और ₹2,200 करोड़ के ऑर्डर मिले।