क्या सरकारी नौकरी में निर्धारित योग्यता से अधिक पढ़ाई होना भी नौकरी जाने की वजह बन सकता है? इसी महत्वपूर्ण सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने का फैसला किया है। मामला एक ऐसे कर्मचारी से जुड़ा है जिसने 10वीं पास योग्यता वाले पद के लिए आवेदन करते समय अपने 12वीं पास होने की जानकारी नहीं दी थी। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फैसला प्रथम दृष्टया गलत लगता है
मंगलवार (2 जून, 2026) को सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने याचिकाकर्ता पवार सुभाष की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान बेंच ने सुभाष की ओर से पेश वकील से कहा, ‘यह फैसला प्रथम दृष्टया गलत है. हम फैसले पर विचार करेंगे. सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला पहले से ही मौजूद है, जिसमें कहा गया है कि उच्च योग्यता अयोग्यता का आधार नहीं हो सकती.’
क्या है पूरा मामला?
मामला अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से आने वाले पवार सुभाष का है। उन्होंने वर्ष 2010 में कार्य सहायक (वर्क असिस्टेंट) के पद के लिए आवेदन किया था। इस पद के लिए न्यूनतम और निर्धारित योग्यता 10वीं पास थी। हालांकि, सुभाष इससे पहले 2006 में 12वीं की परीक्षा भी पास कर चुके थे।
तेलंगाना हाईकोर्ट के अनुसार, आवेदन करते समय सुभाष ने अपनी 12वीं पास योग्यता का खुलासा नहीं किया था। अदालत ने माना कि उनके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही उन्हें नौकरी के लिए चुना गया था।
जानकारी छिपाने पर हुई थी सेवा समाप्त
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, 25 मई 2013 को सुभाष ने एक घोषणा पत्र में अपने 12वीं पास होने की जानकारी दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने यह मानते हुए कि उन्होंने आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी, 27 मई 2013 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
सरकार का कहना था कि उच्च योग्यता को बार-बार छिपाने का कृत्य कर्मचारी की सत्यनिष्ठा पर सवाल खड़ा करता है और यह उसे सरकारी सेवा के लिए अनुपयुक्त बनाता है।
CAT ने पहले दी राहत, फिर सरकार के पक्ष में गया मामला
बर्खास्तगी के खिलाफ सुभाष ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) का दरवाजा खटखटाया था। पहली बार में CAT ने सरकार के आदेश को रद्द करते हुए मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2022 को विस्तृत आदेश जारी कर फिर से कहा कि सुभाष सरकारी पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी उच्च शैक्षणिक योग्यता को जानबूझकर छिपाया था।
सरकार के इस निर्णय के खिलाफ सुभाष दोबारा CAT पहुंचे, लेकिन इस बार न्यायाधिकरण ने सरकार के फैसले को सही ठहराया और माना कि जानकारी छिपाना एक सोची-समझी कार्रवाई थी।
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
CAT के फैसले के बाद सुभाष ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई जानकारी छिपाई भी गई थी तो वह कोई ‘महत्वपूर्ण तथ्य’ नहीं था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दो पुराने फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें कहा गया था कि अधिक शैक्षणिक योग्यता किसी व्यक्ति को अयोग्य नहीं बनाती।
हालांकि, हाईकोर्ट उनकी दलीलों से सहमत नहीं हुआ और याचिका को खारिज कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की दोबारा समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि उच्च योग्यता छिपाने के आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से हटाया जा सकता है या नहीं।