नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची सुधार अभियान (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बयान दिया है। कोर्ट ने आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि बढ़ाने से इनकार कर दिया और सभी राजनीतिक दलों को नसीहत दी कि वे ज़मीनी स्तर पर मतदाताओं की मदद करें।
पार्टियों की उदासीनता पर सवाल
जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि बिहार में 12 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के पास 1,68,000 बूथ लेवल एजेंट (BLA) हैं, लेकिन अब तक ड्राफ्ट लिस्ट में छूटे सिर्फ 2 लोगों के लिए ही आपत्ति दाखिल की गई। कोर्ट ने इसे हैरान करने वाला बताया और कहा कि अगर हर BLA रोज़ 10 लोगों की पुष्टि करे, तो 5 दिन में सभी 65 लाख छूटे हुए नाम जुड़ सकते हैं।
पार्टियों से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सभी मान्यता प्राप्त दलों को इस मामले में पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने उनसे विस्तृत ब्यौरा मांगा है कि उन्होंने अब तक मतदाताओं की मदद के लिए क्या-क्या कदम उठाए। इसके लिए बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया गया कि वह सभी दलों के अध्यक्षों/महासचिवों को नोटिस जारी करें।
योग्य मतदाता नहीं छूटेगा
चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि उसने 1 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट लिस्ट में छूटे 65 लाख लोगों की जिलावार सूची जारी कर दी है और आपत्तियां स्वीकार की जा रही हैं। कोर्ट ने कहा कि एक भी योग्य मतदाता को अंतिम सूची से बाहर नहीं किया जाएगा।
आपत्ति के लिए आधार भी मान्य
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोग पहले से तय दस्तावेजों के साथ आधार नंबर देकर भी अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियां ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से जमा की जा सकती हैं, और BLO के पास आपत्ति दर्ज कराने वालों को रसीद देना अनिवार्य होगा।
तारीख बढ़ाने से इनकार
याचिकाकर्ताओं ने अंतिम तारीख 1 सितंबर से आगे बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।