नई दिल्ली। आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय लिया है। कोर्ट ने न सिर्फ सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को नोटिस जारी किया, बल्कि अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित सभी मामलों को अपने पास ट्रांसफर कर लिया है। अब इस मुद्दे पर देशभर में सुप्रीम कोर्ट ही सुनवाई करेगा।
शेल्टर होम आदेश में बड़ा बदलाव
21 अगस्त को आए आदेश में कोर्ट ने 11 अगस्त को दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पकड़े गए आवारा कुत्तों का नसबंदी (स्टरलाइजेशन) और टीकाकरण (वैक्सिनेशन) किया जाए और फिर उन्हें उसी इलाके में वापस छोड़ा जाए।
- रैबीज से पीड़ित या खतरनाक कुत्तों को ही शेल्टर होम में रखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश की मुख्य बातें
- दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के नगर निगमों को हर इलाके में डॉग फीडिंग एरिया बनाना होगा।
- हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा, जहां उन लोगों की शिकायत की जा सकेगी जो निर्धारित जगहों के बजाय सड़कों और गलियों में कुत्तों को खाना खिलाते हैं।
- आवारा कुत्तों को पकड़ने में बाधा डालने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी।
- जो पशु प्रेमी कोर्ट पहुंचे हैं, उन्हें 25-25 हजार रुपये, जबकि एनजीओ को 2-2 लाख रुपये कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने होंगे। यह राशि पशु कल्याण में ही खर्च होगी।
- कोई भी व्यक्ति कुत्तों को गोद लेने के लिए नगर निगम में आवेदन कर सकता है।
क्यों आया मामला सुप्रीम कोर्ट में?
11 अगस्त को जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में बंद करने का आदेश दिया था। पशु प्रेमियों ने इसे क्रूर और अव्यवहारिक बताते हुए चीफ जस्टिस के सामने चुनौती दी। बाद में यह मामला तीन जजों की बेंच को भेजा गया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने 14 अगस्त को सुनवाई के बाद 21 अगस्त को नया आदेश जारी किया।
देशव्यापी नीति की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में राष्ट्रीय नीति बनाने पर विचार करेगा। मामले की अगली सुनवाई 8 सप्ताह बाद होगी।