नई दिल्ली/नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने गठन के 100 साल पूरे होने के ऐतिहासिक मौके पर संगठन के ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने जा रहा है। संघ की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुकूल बनाने के लिए एक नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव के तहत संघ की दशकों पुरानी ‘प्रांत प्रचारक’ (Province Pracharak) की व्यवस्था को समाप्त कर उसकी जगह ‘संभाग प्रचारक’ (Divisional Pracharak) और ‘राज्य प्रचारक’ की नई संरचना लागू की जाएगी।
‘प्रांत’ की जगह अब ‘संभाग’, राज्य का होगा एक मुखिया
प्रस्तावित नई संरचना के मुताबिक, अब संघ में प्रांत प्रचारक का पद नहीं होगा। उनकी जगह ‘संभाग प्रचारक’ जिम्मेदारी संभालेंगे, जिनका कार्यक्षेत्र पुराने प्रांत प्रचारकों की तुलना में छोटा और अधिक केंद्रित होगा।
- नया फॉर्मूला: करीब 2 सरकारी मंडल (कमिश्नरी) को मिलाकर संघ का एक ‘संभाग’ बनाया जाएगा।
- राज्य प्रचारक: अब हर राज्य का एक ‘राज्य प्रचारक’ होगा, जो पूरे प्रदेश की रिपोर्टिंग लेगा।
यूपी के उदाहरण से समझिए नया गणित
उत्तर प्रदेश के उदाहरण से इस बदलाव को आसानी से समझा जा सकता है:
- मौजूदा व्यवस्था: अभी संघ ने यूपी को 6 प्रांतों (ब्रज, अवध, मेरठ, कानपुर, काशी और गोरक्ष) में बांटा हुआ है और यहां 6 प्रांत प्रचारक काम करते हैं।
- नई व्यवस्था: प्रशासनिक दृष्टि से यूपी में 18 मंडल हैं। नए नियम के तहत (2 मंडल = 1 संभाग), यूपी में अब 9 संभाग प्रचारक होंगे। इन सबके ऊपर पूरे उत्तर प्रदेश का नेतृत्व करने के लिए एक ‘राज्य प्रचारक’ होगा।
सिमट जाएगा क्षेत्र प्रचारकों का दायरा, 11 से घटकर रह जाएंगे 9
सिर्फ निचले स्तर पर ही नहीं, बल्कि ऊपरी स्तर पर भी बड़े बदलाव होंगे। वर्तमान में देश में संघ के 11 क्षेत्र प्रचारक हैं, जिनकी संख्या घटकर अब 9 रह जाएगी।
- यूपी-उत्तराखंड: अभी पूर्वी यूपी और पश्चिम यूपी+उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्र प्रचारक हैं। नई व्यवस्था में पूरे यूपी और उत्तराखंड का एक ही क्षेत्र प्रचारक होगा (हालांकि राज्य प्रचारक दोनों राज्यों के अलग होंगे)।
- उत्तर क्षेत्र का विस्तार: अभी राजस्थान का अलग क्षेत्र प्रचारक है और उत्तर क्षेत्र (दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब) का अलग। प्रस्तावित बदलाव में राजस्थान को भी उत्तर क्षेत्र में मिला दिया जाएगा और इस पूरे विशाल भू-भाग का जिम्मा एक ही क्षेत्र प्रचारक के पास होगा।
कुल मिलाकर क्या बदलेगा?
इस पुनर्गठन के बाद पूरे देश में करीब 75 संभाग प्रचारक होंगे, जो जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करेंगे। संघ का यह कदम शताब्दी वर्ष में संगठन को प्रशासनिक इकाइयों के करीब लाने और समन्वय को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।