वामपंथ के गढ़ में बीजेपी की ऐतिहासिक सेंधमारी, 45 साल का सूखा खत्म, वीवी राजेश बने तिरुवनंतपुरम के पहले भाजपाई मेयर

तिरुवनंतपुरम: दक्षिण भारत में अपनी पैठ जमाने की कोशिश कर रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए शुक्रवार (26 दिसंबर, 2025) का दिन ऐतिहासिक रहा। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी ने वामपंथ (Left) के ‘अभेद किले’ को ध्वस्त करते हुए पहली बार अपना मेयर बनाने में कामयाबी हासिल की है। बीजेपी नेता वीवी राजेश ने मेयर पद की शपथ लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। यह जीत इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि बीजेपी ने नगर निकाय पर सीपीआईएम (CPIM) के 45 वर्षों के एकछत्र राज को खत्म कर दिया है।

कैसे हुआ यह ‘खेल’? निर्दलीय ने दिया साथ

मेयर चुनाव के गणित पर नजर डालें तो 100 सदस्यीय विधानसभा (नगर निगम सदन) में जीत के लिए जादुई आंकड़ा 51 था।

  • बीजेपी (वीवी राजेश): 51 वोट मिले (बहुमत हासिल किया)। बीजेपी की जीत एक निर्दलीय पार्षद पी. राधाकृष्णन के समर्थन से संभव हो पाई।
  • सीपीआईएम (आरपी शिवाजी): 29 वोट मिले।
  • कांग्रेस/यूडीएफ (केएस सबरीनाथन): 19 वोट मिले।
  • एक पार्षद ने वोटिंग से दूरी बनाए रखी।

विधानसभा चुनाव से 6 महीने पहले बड़ा संदेश

केरल में विधानसभा चुनाव होने में अब 6 महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे वक्त में राजधानी के मेयर पद पर कब्जा करना बीजेपी के लिए ‘बूस्टर डोज’ का काम करेगा। राज्य में बीजेपी लंबे समय से संघर्ष कर रही है। अभी तक पार्टी के पास त्रिशूर से केवल एक सांसद (सुरेश गोपी) हैं और इससे पहले 2016 में ओ. राजगोपाल के रूप में एक विधायक रह चुका है। ऐसे में राजधानी में सत्ता परिवर्तन वामदलों और कांग्रेस दोनों के लिए खतरे की घंटी है।

विकास और राजनीति पर क्या बोले नेता?

शपथ लेने के बाद नवनिर्वाचित मेयर वीवी राजेश ने कहा, “हम सब मिलकर आगे बढ़ेंगे… तिरुवनंतपुरम के सभी 101 वार्डों में विकास कार्य लागू किया जाएगा और इसे एक विकसित शहर बनाया जाएगा.” वहीं, केरल बीजेपी प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि सीपीआईएम ने कांग्रेस के परदे के पीछे के समर्थन से तिरुवनंतपुरम को बर्बाद कर दिया था, जिसे अब सुधारा जाएगा।

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