मनरेगा खत्म करने पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, बोले- मंत्री तक को नहीं लगी भनक, यह नोटबंदी जैसा विनाशकारी फैसला

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर उसकी जगह ‘विकसित भारत जी राम जी विधेयक 2025’ लाने के फैसले पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की हाई-प्रोफाइल बैठक में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस निर्णय को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पर गंभीर आरोप लगाए। सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में राहुल गांधी ने दावा किया कि इस फैसले की जानकारी संबंधित मंत्री तक को नहीं थी और यह कदम नोटबंदी की तरह ही देश के लिए विनाशकारी साबित होगा।

‘शिवराज सिंह चौहान से भी नहीं किया गया विचार-विमर्श’

राहुल गांधी ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मनरेगा को बंद करने का फरमान सीधे पीएमओ से जारी हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बड़े फैसले से पहले केंद्रीय कैबिनेट या ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। राहुल गांधी ने बैठक के बाद कहा, “‘मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं थी, बल्कि यह अधिकार आधारित परिकल्पना थी. योजना को खत्म करना इस परिकल्पना पर आक्रमण है.'” उन्होंने इसे संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए कहा, “‘वन मैन शो’ चल रहा है. मोदी जो चाहते हैं, वही करते हैं.'”

खरगे बोले- सरकार को दोबारा बहाल करना होगा मनरेगा

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि इस योजना ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी थी। उन्होंने कहा, “‘मनरेगा ने ग्रामीण भारत का चेहरा बदला है. यह विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम बना. इससे पलायन रुका. गांवों को अकाल, भूख, और शोषण से मुक्ति मिली.'” खरगे ने कृषि कानूनों की वापसी का उदाहरण देते हुए भविष्यवाणी की कि सरकार को झुकना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “‘हाल में उन्होंने (राहुल गांधी) ये भी भविष्यवाणी की है कि मोदी सरकार को दुबारा मनरेगा बहाल करना होगा.'” खरगे ने पार्टी नेताओं से एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बना कानून

गौरतलब है कि संसद ने बीते 18 दिसंबर को ‘विकसित भारत जी राम जी विधेयक 2025’ को पारित किया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद अब यह अधिनियम बन चुका है, जिसने दो दशक पुरानी रोजगार गारंटी योजना की जगह ले ली है। कांग्रेस का आरोप है कि यह फैसला गरीबों, दलितों और आदिवासियों के भरोसे को तोड़ने वाला है।

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