इस साल गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2026) का समारोह देशवासियों के लिए बेहद खास होने वाला है। कर्तव्य पथ के आसमान में भारतीय वायुसेना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का जश्न मनाती नजर आएगी। वायुसेना के फ्लाई-पास्ट में इस बार लड़ाकू विमान एक विशेष ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ में उड़ान भरते दिखाई देंगे, जो पाकिस्तान के खिलाफ की गई जवाबी कार्रवाई की याद दिलाएगा। इसमें रफाल, सुखोई, मिग-29 और जगुआर जैसे घातक लड़ाकू विमान अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे।
‘ध्वज’ और ‘प्रहार’ फॉर्मेशन से होगा आगाज
वायुसेना के मुताबिक, 26 जनवरी को फ्लाई-पास्ट की शुरुआत ‘ध्वज फॉर्मेशन’ से होगी। इसमें चार (04) मी-17 हेलीकॉप्टर हिस्सा लेंगे। सबसे आगे वाला हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) लेकर चलेगा, जबकि बाकी तीन हेलीकॉप्टर थलसेना, वायुसेना और नौसेना के झंडे लेकर उड़ान भरेंगे। इसके बाद दूसरी फॉर्मेशन ‘प्रहार’ की होगी, जिसमें तीन एएलएच (एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर) शामिल होंगे। खास बात यह है कि इनमें से एक हेलीकॉप्टर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा लेकर उड़ान भरेगा।
पाकिस्तान को दहलाने वाले विमान बनाएंगे ‘स्पियरहेड’ व्यूह
विंग कमांडर राजीव देशवाल ने एबीपी न्यूज को बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला गणतंत्र दिवस है, इसलिए इसकी झलक आसमान में भी दिखेगी। फ्लाई-पास्ट में एक खास ‘स्पियरहेड फॉर्मेशन’ (भाले के आकार की रचना) बनाई जाएगी। इस फॉर्मेशन में वही फाइटर जेट्स शामिल होंगे जिन्होंने पहलगाम नरसंहार के बाद पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में हिस्सा लिया था। इसमें 2 रफाल, 2 सुखोई (Su-30), 2 मिग-29 और 1 जगुआर फाइटर जेट शामिल होंगे। ज्ञात हो कि 7-10 मई के बीच चलाए गए इस ऑपरेशन में वायुसेना ने पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर समेत कई सैन्य ठिकानों को तबाह किया था।
दो चरणों में होगा शो, अग्निवीरों की भी दिखेगी धमक
फ्लाई-पास्ट को इस बार दो चरणों में बांटा गया है:
- पहला चरण: यह वायुसेना के मार्चिंग दस्ते के गुजरने के दौरान होगा, जिसमें सिंदूर फॉर्मेशन दिखाई देगी।
- दूसरा चरण: यह मार्च-पास्ट खत्म होने के बाद होगा, जिसमें रफाल विमान मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा।
इसके अलावा, वायुसेना के मार्चिंग दस्ते का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर जगदेश कुमार करेंगे, जिसमें 114 वायु योद्धा शामिल होंगे। वहीं, ध्वजारोहण में राष्ट्रपति के साथ फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ मौजूद रहेंगी। एक और ऐतिहासिक बदलाव यह है कि वायुसेना के मिलिट्री बैंड में पहली बार महिला और पुरुष ‘अग्निवीरों’ को भी शामिल किया गया है।