शंकराचार्य के शिविर में डंडे लेकर घुसे युवक, लगे ‘बुलडोजर बाबा’ के नारे, पुलिस के उड़े होश

प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शनिवार (24 जनवरी) की शाम माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर हंगामा और मारपीट की खबरें सामने आईं. इस घटना के बाद प्रयागराज पुलिस ने आनन-फानन में सफाई जारी करते हुए दावा किया है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है. पुलिस के मुताबिक, यह घटना उस वक्त हुई जब मीडिया से बातचीत चल रही थी, लेकिन सूचना मिलते ही थाना प्रभारी और भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत करा दिया. पुलिस ने बताया कि इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ शिविर, लेकिन गिरफ्तारी अब तक नहीं

पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मेले में आए सभी साधु-संतों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा चाक-चौबंद है. एहतियात के तौर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है. घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी माघ मेला, सीओ कल्पवासी और एएसपी दक्षिणी झूंसी ने खुद मौके का मुआयना किया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इतना बवाल होने के बावजूद अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.

‘आई लव बुलडोजर बाबा’ के नारे और डंडे लेकर हंगामा

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद शनिवार शाम मीडिया को संबोधित कर रहे थे. उसी दौरान हाथों में डंडे और भगवा झंडे लिए कुछ युवकों ने शिविर में जबरन घुसने का प्रयास किया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ये युवक ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ के नारे लगा रहे थे. जब वहां मौजूद भक्तों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो नौबत मारपीट तक आ गई. इस घटना से नाराज शंकराचार्य ने कल्पवासी थाने में शिकायत दर्ज कराई है और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा, “यदि कोई घटना घटती है तो प्रयागराज पुलिस-प्रशासन जिम्मेदार होगा.”

सवालों के घेरे में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था

भले ही पुलिस ‘सब ठीक है’ का दावा कर रही हो, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच हाथ में डंडे लेकर युवक शिविर तक कैसे पहुंच गए? उन्हें पहले ही क्यों नहीं रोका गया? इस घटना के बाद से संगम क्षेत्र में मौजूद साधु-संतों में भारी आक्रोश है. पहले से ही संवेदनशील चल रहे इस मामले में अब स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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