NEET-UG री-एग्जाम से पहले करीब 1600 छात्रों की चिंता बढ़ गई है। परीक्षा से जुड़ी नई याचिकाओं पर सुनवाई की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे छात्रों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इन मामलों पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इससे जुड़े सभी मामले पहले से ही एक अन्य बेंच के समक्ष लंबित हैं।
21 जून को प्रस्तावित NEET-UG री-एग्जाम से पहले छात्रों ने एडमिट कार्ड डाउनलोड न होने और परीक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
CJI सूर्यकांत ने क्यों ठुकराई तत्काल सुनवाई की मांग?
सुप्रीम कोर्ट में छात्रों की ओर से पेश वकील ने बताया कि लगभग 1600 उम्मीदवार भारी तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि कई छात्र अब तक अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं, जबकि परीक्षा में बहुत कम समय बचा है।
वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट में हुई हालिया सुनवाई का भी हवाला दिया, जहां सोशल मीडिया पर नीट पेपर लीक से जुड़ी खबरों का जिक्र हुआ था। इसके आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “हम इस पर सुनवाई नहीं करेंगे. हमें पता है कि इन चीजों के लिए न्यायिक मंचों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है… ये सभी मामले जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच के सामने हैं. जब छुट्टियां खत्म हो जाएंगी, तब इन सभी मामलों पर सुनवाई होगी.”
जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच के पास लंबित हैं मामले
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवाद पहले से ही जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष विचाराधीन हैं। ऐसे में नई याचिकाओं की सुनवाई भी वही बेंच करेगी।
कोर्ट के इस रुख से यह साफ हो गया है कि फिलहाल परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह का तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप नहीं होगा।
पेपर लीक के बाद दोबारा हो रही है परीक्षा
गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा पहले 3 मई को आयोजित की गई थी। हालांकि बाद में पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया था।
मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। इसी के बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया था। परीक्षा से ठीक पहले एडमिट कार्ड और अन्य तकनीकी समस्याओं को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ी हुई है।
टेलीग्राम की याचिका भी हाईकोर्ट ने की खारिज
इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को भी बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें 22 जून तक लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी।
सरकार का तर्क था कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम पर मौजूद बॉट्स के जरिए बड़ी मात्रा में जानकारी बेहद तेजी से साझा की जा सकती है, जिसका दुरुपयोग परीक्षा से संबंधित गतिविधियों में किया जा सकता है।
सरकार के फैसले को कोर्ट ने माना उचित
टेलीग्राम की ओर से कहा गया था कि केवल उसी प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया जा रहा है जबकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं, इसलिए यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष को स्वीकार करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए दिए गए कारण पर्याप्त हैं। अदालत ने माना कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत निर्धारित प्रक्रिया का उचित तरीके से पालन किया गया है।
परीक्षा से पहले छात्रों की बढ़ी चिंता
NEET-UG री-एग्जाम में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे में एडमिट कार्ड डाउनलोड न होने और परीक्षा संबंधी विवादों के कारण हजारों छात्रों की चिंता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद अब छात्रों की नजरें आगामी सुनवाई और परीक्षा प्रबंधन पर टिकी हुई हैं।