ईरान सीजफायर पर महबूबा मुफ्ती का बयान, पाकिस्तान की तारीफ कर केंद्र को घेरा

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ईरान में हुए सीजफायर को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने ईरान संघर्ष में सीजफायर और बातचीत की प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की और साथ ही केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज के राजनीतिक माहौल में कुछ लोगों के लिए पाकिस्तान का नाम लेना भी मुश्किल बना दिया गया है।

सीजफायर को बताया सकारात्मक संकेत

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कई दिनों तक चले तनाव के बाद हुआ सीजफायर क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगाने वाला कदम है। उनके अनुसार, यदि वैश्विक नेता संयम नहीं बरतते तो हालात और गंभीर हो सकते थे। उन्होंने कहा, “अगर दुनिया के नेता अपना नियंत्रण खो देते हैं, तो स्थिति और बिगड़ सकती है, लेकिन हमारा मानना है कि न्याय और शांति की ही जीत होगी.”

पाकिस्तान की भूमिका पर खुलकर बोलीं मुफ्ती

ईरान से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव के दौरान उठाए गए कुछ कदमों की वजह से हालात नियंत्रण में आए और सीजफायर संभव हो सका। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “भले ही कुछ लोग शांति प्रयासों के लिए पाकिस्तान का नाम लेने में असहज महसूस करते हों, लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान ने एक वैश्विक संघर्ष को टाल दिया है और हमें इस प्रयास के लिए उनका आभारी होना चाहिए.”

मुफ्ती मोहम्मद सईद की सोच का किया जिक्र

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की नीतियों को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा संवाद और समझौते को ही स्थायी शांति का रास्ता मानते थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में भी उसी सोच को अपनाने की आवश्यकता है।

कश्मीर के हालात पर जताई चिंता

महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। उन्होंने गांदरबल में कथित फर्जी मुठभेड़ का मुद्दा उठाया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “लोग न केवल संघर्ष से डरे हुए हैं, बल्कि अपने आस-पास की स्थिति से भी भयभीत हैं. इन चिंताओं को संवेदनशीलता के साथ संबोधित करने की आवश्यकता है. हमारे सामने राशिद मुगल का मामला है, जिसे पहले एक विदेशी आतंकवादी बताया गया था, और फिर दबाव पड़ने पर उसे एक स्थानीय आतंकवादी करार दे दिया गया. और अब भी उसका शव उसके परिवार को नहीं सौंपा गया है.”

धार्मिक मुद्दों को लेकर भी उठाए सवाल

अपने भाषण में उन्होंने धार्मिक मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ अल-अक्सा मस्जिद 40 दिनों बाद फिर से खोल दी गई है, जबकि श्रीनगर की जामिया मस्जिद अब भी बंद है, जिसे उन्होंने चिंताजनक बताया। उनके अनुसार, ऐसे निर्णय लेते समय संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

शांति और धैर्य बनाए रखने की अपील

अपने संबोधन के अंत में महबूबा मुफ्ती ने लोगों से शांति बनाए रखने और धैर्य रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में समझदारी से काम लेना जरूरी है और अंततः सच्चाई और न्याय की ही जीत होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *