सोना न खरीदने से विदेश यात्रा घटाने तक, PM मोदी की अपील पर केजरीवाल ने उठाए बड़े सवाल

प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील को लेकर राजनीति तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने पीएम मोदी के बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या देश आर्थिक इमरजेंसी की ओर बढ़ रहा है?

‘क्या देश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है?’ — केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने में कटौती करने की सलाह दी है, घूमने-फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है, तथा सोना और अन्य कीमती चीज़ें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है. क्या यह आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ. प्रधानमंत्री जी को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए. आखिर देश की असली आर्थिक हालत क्या है?”

केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश की आर्थिक स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।

PM मोदी ने क्या अपील की थी?

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी। इसके साथ ही उन्होंने खाने में तेल की खपत कम करने, विदेश यात्राओं में कटौती करने, वर्क फ्रॉम होम और कार पूलिंग अपनाने की भी सलाह दी थी।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि विदेशी मुद्रा बचाना मौजूदा समय में देश के लिए बेहद जरूरी है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

संजय सिंह ने भी साधा निशाना

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने भी पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अब देशभक्ति के नाम पर लाइन में लग जाओ। गैस महंगी हो गई अब पेट्रोल डीज़ल भी महंगा होगा। आप देश भक्ति के नाम पर पेट्रोल डीज़ल गैस का इस्तेमाल न करो, सोना न खरीदो, खाने के तेल का भी इस्तेमाल न करो। लेकिन मोदी जी अपनी रैलियों में लाखों लोगों को भर-भर के लायेंगे, विदेश यात्राएं करेंगे, खूब तेल फूकेंगे, उनके लोग सोना तो क्या पूरे देश की सम्पतियां खरीद लेंगे. लेकिन आप फटीचर बने रहिए.”

संजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

आर्थिक बहस के केंद्र में PM की अपील

प्रधानमंत्री की अपील को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज होती जा रही है। एक तरफ सरकार इसे विदेशी मुद्रा बचाने और आर्थिक अनुशासन से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे देश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता का संकेत बता रहा है।

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