जम्मू-कश्मीर: प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है कि वह इस मामले में समय-सीमा तय करेगा, ताकि जल्द ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिल सके।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट 10 अक्टूबर से पहले इस मामले पर सुनवाई नहीं कर रहा। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद थी कि भारत सरकार जल्द ही राज्य का दर्जा बहाल करेगी। जिस दिन हमारी सरकार बनी, उसी दिन विधानसभा में बहाली का प्रस्ताव पारित किया गया था।”
पीएम मोदी के सामने उठाया मुद्दा
अब्दुल्ला ने दावा किया कि, “प्रधानमंत्री मोदी के साथ पहली मुलाकात में ही मैंने उन्हें यह प्रस्ताव सौंपा था। हमने धैर्य रखा और इंतजार किया, लेकिन अब तक इस मुद्दे पर हमें केवल इंतजार ही मिला है।”
उन्होंने कहा कि आज वे मुख्यमंत्री हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्धारित समय के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया था। लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई तय समय-सीमा नहीं दी गई।
महबूबा मुफ्ती के विरोध पर प्रतिक्रिया
राजनीतिक बंदियों की रिहाई को लेकर महबूबा मुफ्ती के प्रदर्शन पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह विषय केंद्र सरकार के अधीन है। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था सीधे नई दिल्ली से संचालित होती है। मैं महबूबा जी से कहूंगा कि वह दिल्ली जाकर गृह मंत्री से मिलें और स्थिति से उन्हें अवगत कराएं। हम चाहे कितने भी चिंतित हों, इस विषय पर खुद कुछ नहीं कर सकते।”
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला
14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के दर्जे से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से 8 सप्ताह में लिखित जवाब दाखिल करने को कहा था। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बी आर गवई ने कहा था कि इस मामले में जमीनी हालात को भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने हाल में पहलगाम में हुई घटना का भी जिक्र किया।
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया था।