पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत देने वाली खबर सामने आई है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण जहां सैकड़ों जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, वहीं भारत के एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में सफल रहे हैं। इस घटनाक्रम को देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे दो भारतीय LPG टैंकर
सूत्रों और आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर होर्मुज ऑफ स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं, जबकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर यातायात अब भी प्रभावित बना हुआ है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार सोमवार (23 मार्च) को ‘पाइन गैस’ टैंकर जलडमरूमध्य पार कर गया, जबकि उसके पीछे ‘जग वसंत’ भी उसी मार्ग से आगे बढ़ रहा था।
दोनों जहाज सोमवार दोपहर ईरान के लारक और क़ेशम द्वीपों के बीच समुद्री क्षेत्र के पास देखे गए और ये उन 22 भारतीय जहाजों में शामिल थे, जो पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंस गए थे।
पहले भी सुरक्षित पहुंच चुके हैं भारतीय जहाज
इससे पहले लगभग 92,712 टन एलपीजी लेकर आ रहे एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट तक पहुंच चुके हैं। उस समय होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले कुल 28 जहाज मौजूद थे, जिनमें से 24 पश्चिमी हिस्से और चार पूर्वी हिस्से में थे।
एलपीजी वाहक जहाज शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पहुंचा, जबकि नंदा देवी अगले दिन कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। दोनों जहाजों ने 13 मार्च को यात्रा शुरू की थी और 14 मार्च की सुबह जलडमरूमध्य पार किया था।
अन्य भारतीय टैंकर भी सुरक्षित मार्ग पर
संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चा तेल लेकर आया भारतीय टैंकर ‘जग लाडकी’ 18 मार्च को मुंदड़ा बंदरगाह पहुंच चुका है। वहीं एक अन्य टैंकर ‘जग प्रकाश’ भी सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुका है और तंजानिया की ओर बढ़ रहा है। यह जहाज ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन लेकर जा रहा था।
LPG सप्लाई को लेकर बढ़ी उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय जहाजों का सुरक्षित गुजरना देश में एलपीजी आपूर्ति को स्थिर रखने के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच यह घटनाक्रम भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस परिवहन होता है।