मिडिल ईस्ट युद्ध और महंगा तेल बढ़ाएंगे टेंशन? इस हफ्ते शेयर बाजार में आ सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर रहने वाली है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों का रुख और रुपये-डॉलर की चाल निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगे, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों ने जताई सतर्क रहने की सलाह

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजित मिश्रा ने कहा, “मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस सप्ताह बाजार आंकड़ों के प्रति संवेदनशील रह सकता है. पश्चिम एशिया संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख बाहरी कारक बने रहेंगे और निकट अवधि में बाजार रुझान को तय करेंगे.”

उन्होंने आगे कहा, “घरेलू मोर्चे पर निवेशक विनिर्माण, सेवाओं और कंपोजिट श्रेणियों के लिए एचएसबीसी के पीएमआई के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे, जो व्यावसायिक गतिविधियों के रुझानों का शुरुआती संकेत देगा.”

विदेशी निवेशकों ने बनाई दूरी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर रुपये और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इसका असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये की निकासी की है, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।

बाजार रहेगा घटना-आधारित और अस्थिर

ऑनलाइन ट्रेडिंग फर्म एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा, “बाजारों के अत्यधिक अस्थिर और घटना आधारित रहने का अनुमान है. निकट अवधि की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों, विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास उभरती स्थिति पर निर्भर करेगी.”

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं तो बढ़ेगा दबाव

विशेषज्ञों के अनुसार यदि आपूर्ति में लंबा व्यवधान बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं। इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ेगा और निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति मजबूत हो सकती है।

उन्होंने कहा कि एफआईआई निवेश, रुपये की स्थिति और अमेरिकी डॉलर की मजबूती जैसे वैश्विक संकेतकों पर भी बाजार की नजर रहेगी। यदि तनाव कम होता है या कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो बाजार में तेजी संभव है, जबकि संकट बढ़ने की स्थिति में गिरावट का दबाव बढ़ सकता है।

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