अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘वैश्विक टैरिफ’ (Global Tariffs) को रद्द किए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर है। कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को उन्होंने अपना ‘अपमान’ और एक ‘मूर्खतापूर्ण’ कदम करार दिया है। हालांकि, इस झटके के बाद पीछे हटने के बजाय ट्रंप ने अपनी भड़ास निकालते हुए दुनिया भर के देशों को एक नई और बड़ी आर्थिक धमकी दे डाली है।
‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने असल में बढ़ा दी मेरी ताकत’
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि कोर्ट के इस हास्यास्पद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभाजनकारी फैसले ने असल में राष्ट्रपति के तौर पर उनकी शक्तियों को पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है।
- लाइसेंस का हथियार: ट्रंप ने सीधे तौर पर धमकी देते हुए कहा कि वह ‘लाइसेंसिंग’ का इस्तेमाल करके उन देशों के खिलाफ ‘बेहद भयानक कदम’ उठा सकते हैं, जिन्होंने दशकों तक अमेरिका का आर्थिक शोषण किया है।
- फीस पर सवाल: उन्होंने अदालत के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा, “हैरानी की बात है कि फैसले के अनुसार मैं दूसरे देशों से लाइसेंस शुल्क नहीं ले सकता। जबकि दुनिया के हर लाइसेंस के साथ एक शुल्क जुड़ा होता है, तो अमेरिका ऐसा क्यों नहीं कर सकता?”
अब ट्रंप को सता रहा है चीन और ‘जन्मजात नागरिकता’ का डर
ट्रंप ने आशंका जताई है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट यहीं नहीं रुकेगा और भविष्य में टैरिफ से आगे जाकर ‘जन्मजात नागरिकता’ (Birthright Citizenship) जैसे अहम मुद्दों पर भी चीन या अन्य देशों के पक्ष में फैसला सुना सकता है। अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) का जिक्र करते हुए उन्होंने कोर्ट पर तंज कसा कि वह किसी न किसी तरह गलत निष्कर्ष पर ही पहुंचेगा।
गुस्से में 10% से बढ़ाकर सीधा 15% कर दिया टैरिफ
सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के तुरंत बाद ट्रंप ने बौखलाहट में एक नए कानून के तहत 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ थोपने का ऐलान किया था। लेकिन उनका गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ। शनिवार (21 फरवरी 2026) को उन्होंने इस आर्थिक युद्ध को और तेज करते हुए इस ग्लोबल टैरिफ को बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी कर दिया है, जिससे पूरी दुनिया के शेयर बाजारों और ग्लोबल ट्रेड में खलबली मच गई है।