अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अपनी सियासी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। रविवार (22 फरवरी 2026) को लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल ‘ऑल इंडिया बैठक’ आयोजित की गई। इस बैठक में 19 दिसंबर 2025 को दिल्ली में दिए गए दिशा-निर्देशों की राज्यवार प्रगति रिपोर्ट ली गई और देश के ज्वलंत राजनीतिक मुद्दों पर गहन मंथन किया गया।
‘जैसे-जैसे बसपा मजबूत होगी, साजिशें और बढ़ेंगी’
बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में जोश भरा। उन्होंने आगाह किया कि जैसे-जैसे और जहाँ-जहाँ बीएसपी मजबूत होती जाएगी, विरोधियों के षड्यंत्र भी उसी तेजी से बढ़ते जाएंगे। इन हथकंडों का डटकर सामना करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुजन समाज को अपने पैरों पर खड़ा करने और उनके आत्म-सम्मान के लिए ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ हासिल करना ही पार्टी का मुख्य लक्ष्य है।
पूंजीपतियों पर तंज और ‘बिकाऊ’ लोगों से सावधान रहने की अपील
चुनावी चंदे और इलेक्टोरल बॉन्ड का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए बसपा चीफ ने कहा कि जो पार्टियां बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों की साठगांठ पर निर्भर रहती हैं, उनका हश्र पूरी दुनिया देख रही है। बीएसपी इकलौती ऐसी पार्टी है जो अपने गरीब और मेहनतकश कार्यकर्ताओं की खून-पसीने की कमाई (चंदे) से चलती है। इसके साथ ही, उन्होंने समाज के उन ‘बिकाऊ’ और ‘गुलाम मानसिकता’ वाले नेताओं से सावधान रहने की अपील की, जो बीएसपी के सहारे आगे बढ़े लेकिन स्वार्थ के लिए समाज को धोखा दे गए। उन्होंने कहा कि जो अपनी पार्टी के नहीं हुए, वो समाज के क्या सगे होंगे।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मोदी सरकार को नसीहत
बैठक में हालिया ‘भारत-यूएस ट्रेड डील’ (India-US Trade Deal) को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने कहा कि खुद को ‘फर्स्ट’ बनाने के इस वैश्विक ‘कट-थ्रोट कॉम्पिटिशन’ ने शोषणकारी व्यवस्था को और गहरा कर दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि सरकार के सामने देश के किसानों और बहुजनों के हितों को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती है। भारत ने यह ट्रेड डील ‘अपनी शर्तों’ पर की है, यह बात केवल सरकारी दावों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी हकीकत में भी दिखनी चाहिए।