देश से ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ (Colonial Mindset) के प्रतीकों को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राष्ट्रपति भवन के ‘सेंट्रल कोर्टयार्ड’ से मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एडविन लुटियंस की कांसे की मूर्ति को हमेशा के लिए हटा दिया गया है। अब उसी जगह पर आजाद भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की भव्य प्रतिमा स्थापित कर दी गई है।
रेडियो कार्यक्रम में PM मोदी का ऐलान, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया स्थापित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (22 फरवरी) को अपने रेडियो कार्यक्रम (131वें एपिसोड) में इस बड़े बदलाव की घोषणा की थी। पीएम ने कहा था कि आज देश गुलामी की निशानियों को पीछे छोड़कर भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को महत्व दे रहा है। इसके बाद, सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के अंदर बड़ी खुली सीढ़ियों के पास राजाजी की मूर्ति का आधिकारिक तौर पर अनावरण किया। यहाँ 1 मार्च तक एक विशेष प्रदर्शनी भी चलेगी।
पीएम मोदी ने ‘एक्स’ (X) पर इस कदम की सराहना करते हुए लिखा, “यह एक सराहनीय प्रयास है… राजाजी एक प्रखर विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी और प्रशासक थे। उनका जीवन राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक था।”
कौन थे सर एडविन लुटियंस?
- नई दिल्ली के मुख्य वास्तुकार: 29 मार्च 1869 को लंदन में जन्मे लुटियंस को 20वीं सदी का महान आर्किटेक्ट माना जाता है।
- क्या-क्या बनाया? 1911 में जब ब्रिटिश इंडिया की राजधानी कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट हुई, तो किंग जॉर्ज V ने उन्हें चीफ आर्किटेक्ट बनाया था। लुटियंस ने अपने साथी हर्बर्ट बेकर के साथ मिलकर वायसराय हाउस (वर्तमान राष्ट्रपति भवन), इंडिया गेट, नॉर्थ-साउथ ब्लॉक और कनॉट प्लेस का डिजाइन तैयार किया था। दिलचस्प बात यह है कि अब लुटियंस की मूर्ति उसी बिल्डिंग से हटाई गई है, जिसे उन्होंने खुद डिजाइन किया था।
कौन थे सी. राजगोपालाचारी (राजाजी)?
- राजाजी एक प्रखर वकील, स्वतंत्रता सेनानी और महात्मा गांधी के बेहद करीबी सहयोगी थे।
- वे आजाद भारत के पहले और इकलौते ‘भारतीय गवर्नर जनरल’ बने। बाद में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की नीतियों के विरोध में अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी (स्वतंत्र पार्टी) भी बनाई थी।
ब्रिटिश राज की निशानियां मिटाने का ‘मिशन 2035’
पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने ब्रिटिश राज की निशानियों को मिटाने के लिए साल 2035 तक की एक डेडलाइन तय की है। इसके तहत हाल के वर्षों में कई बड़े बदलाव हुए हैं:
- 2022: राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया गया।
- 2023: पुरानी संसद की जगह नई संसद भवन का उद्घाटन।
- 2026: प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (PMO) को कॉलोनियल एरा के ‘साउथ ब्लॉक’ से हटाकर ‘सेवा तीर्थ’ नाम के नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट किया गया।