
चंद्रयान-3 की सफलता से पूरा देश खुश और उत्साहित है, लेकिन राजनीतिक पार्टियों में इस सफलता का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। एक भारतीय के तौर पर बीता हफ्ता गौरवान्वित करने वाला रहा। इसरो ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिग कर इतिहास रच दिया। इसे लेकर जहां पूरे देश में गर्व का माहौल है, वहीं राजनीतिक पार्टियों में इसका श्रेय लेने की भी होड़ मची है। किसी ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री को दिया तो किसी ने पूर्व प्रधानमंत्री को श्रेय दिया है। श्रेय लेने की राजनीति क्यों हो रही है और इसके क्या निहितार्थ हैं,यह किसी एक व्यक्ति की सफलता नहीं है। किसी ने इसके बारे में सोचा। किसी ने उसका बुनियादी ढांचा तैयार किया। किसी ने मिशन को आगे बढ़ाया। अगर इसका क्रेडिट पीएम मोदी को दिया जाए तो हमें पंडित नेहरू को भी नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने इसरो की स्थापना कराई। इसलिए इस मिशन का क्रेडिट पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी को भी दिया जाना चाहिए। चंद्रयान-2 मिशन की विफलता से चंद्रयान-3 मिशन की सफलता तक प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह से वैज्ञानिकों को प्रेरित किया और उन्हें सहयोग दिया, उसका श्रेय भी पीएम मोदी को मिलना चाहिए। एक तरह से यह हर भारतीय का श्रेय है।इसमें किसी एक पार्टी या किसी एक व्यक्ति का योगदान नहीं है। जब 2019 में चंद्रयान-2 मिशन असफल हुआ था तो पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को कई बार इसरो के वैज्ञानिकों के पास भेजा था और वैज्ञानिकों को पूरे सहयोग का आश्वासन दिया था। इस दौरान बजट आवंटन और अन्य सहयोग का भी ध्यान रखा गया। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री को इसका श्रेय मिलता है तो इसमें गलत क्या है। इसमें देश के वैज्ञानिकों का भी योगदान है, यह पूरे देश की सफलता है।इसरो की उपलब्धि को हम भारत और भारतीयों की उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं, लेकिन यह पूरे विज्ञान और पूरी मानवता की उपलब्धि है। इसका श्रेय, विज्ञान और विज्ञानधर्मिता को दिया जाना चाहिए। हर देश, विज्ञान का समाज के कल्याण में इस्तेमाल करता है और इसमें सरकार की भूमिका होती है। लेकिन इसका राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना अखरता है। ‘पीएम मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और चंद्रयान सफल हो रहा है तो उसका श्रेय अगर पीएम मोदी को मिल रहा है तो उसमें गलत क्या है। जब इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से बात की थी, जब कंप्यूटर क्रांति हुई थी तो उस वक्त भी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को ही श्रेय दिया गया था। तो अगर अब मौजूदा पीएम को श्रेय दिया जा रहा है तो उसमें आपत्ति क्या है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सफलता का श्रेय देश के वैज्ञानिकों को दिया। हालांकि, वे पंडित नेहरू का नाम ले लेते तो और अच्छा होता। भाजपा के सारे ट्वीट में मौजूदा सरकार का जिक्र है, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी का कोई जिक्र क्यों नहीं किया! जबकि अटल जी की सरकार में ही चंद्रयान मिशन पर काम शुरू हुआ था। देश निरंतरता में आगे बढ़ता है। जो पहले दौड़ता है, वह भी अहम है और जो अंत में दौड़ता है, वह भी अहम है। यह देश की उपलब्धि है, लेकिन इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।’