दिल्ली में खत्म होगा BJP का वनवास या AAP की बनेगी सरकार, CM मोहन यादव ने किया ये बड़ा दावा

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को हुए मतदान के बाद आए एग्जिट पोल के रुझानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा की सरकार बनने का पूरा भरोसा जताया। मोहन यादव ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि जिस तरह से एग्जिट पोल के नतीजे आए हैं, उससे साफ है कि दिल्ली भाजपा की ओर बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह के काम किए हैं, जनता का दिल जीत लिया है। दिल्ली की दुर्दशा कांग्रेस और आप दोनों के कारण हुई है और यही कारण है कि ऐसे नतीजे आ रहे हैं, जनता निराश है।उन्होंने भरोसा जताया कि 8 फरवरी को दिल्ली में निश्चित रूप से भाजपा की सरकार बनने वाली है। हम सबके लिए सौभाग्य की बात है कि जनता ने तय कर लिया है कि अब कमल खिलेगा और अब भाजपा के ऊपर भरोसा करके दिल्ली सुशासन की तरफ बढ़ेगी और भाजपा की सरकार बनेगी, दिल्ली की सूरत बदलेगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 5 फरवरी को मतदान हो चुका है। शुक्रवार 8 फरवरी को नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले कई मीडिया संस्थानों ने एग्जिट पोल किया है। अधिकांश एग्जिट पोल में भाजपा की सरकार बनने का पूर्वानुमान जताया गया है। इसके बाद से भाजपा में खुशी की लहर है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा सहित अनेक नेताओं ने प्रचार किया था। कई नेताओं की तो संगठन ने वहां स्थाई तौर पर तैनाती की थी। ये नेता चुनाव शुरू होने से लेकर अंत तक मैदान में डटे रहे।
दिल्ली में मतदान खत्म होने के बाद सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार दिल्ली में सरकार किसकी बनेगी। क्या दिल्ली की सत्ता में आम आदमी पार्टी का दबदबा कायम रहेगा या फिर 27 साल बाद भाजपा सत्ता में वापसी करेगी? दिल्ली चुनाव न केवल राज्य की सत्ता का फैसला करेगा बल्कि इसका राजनीतिक प्रभाव भी तय करेगा। भाजपा और आम आदमी पार्टी की जीत और हार के अपने-अपने राजनीतिक मायने हैं।
दिल्ली में आप की जीत के मायने
अगर आम आदमी पार्टी इस बार भी दिल्ली में विधानसभा चुनाव जीतने में सफल होती है तो वह लगातार चौथी बार दिल्ली में सरकार बनाकर इतिहास रच देगी। इस जीत का असर न केवल दिल्ली की राजनीति पर बल्कि देश की राजनीति पर भी पड़ेगा। अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक कद जबरदस्त बढ़ेगा और वह विपक्ष के सबसे बड़े नेता बन जाएंगे, जिन्होंने लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के सामने दिल्ली में भाजपा को हराया। अरविंद केजरीवाल इस मामले को पूरे देश में प्रचारित करेंगे।
दिल्ली में भाजपा की जीत के मायने
अगर भाजपा दिल्ली में विधानसभा चुनाव जीतने में सफल हो जाती है तो वह लंबे समय के बाद सत्ता में वापसी करेगी। इस तरह भाजपा दिल्ली में अपना 27 साल का वनवास खत्म करने में सफल हो जाएगी। दिल्ली में 11 साल बाद डबल इंजन की सरकार होगी। पहली बार भाजपा की डबल इंजन सरकार होगी, जिसमें दिल्ली और केंद्र दोनों जगह उसकी सरकार होगी। इसके अलावा भाजपा को भी राजनीतिक बल मिलेगा, जिसे लोकसभा चुनाव में सीटें कम होने से तगड़ा झटका लगा था। ब्रांड मोदी को भी मजबूती मिलेगी।अगर दिल्ली में भाजपा जीत जाती है तो महाराष्ट्र के बाद यह नैरेटिव ध्वस्त माना जाएगा, क्योंकि महाराष्ट्र में क्षेत्रीय दलों को हराने के बाद अगर दिल्ली में भी भाजपा अपने दम पर क्षेत्रीय दल को हरा देती है तो क्षेत्रीय दलों के सामने भी भाजपा मजबूत मानी जाएगी। बिहार चुनाव में भी इसका असर बढ़ेगा। भाजपा का राजनीतिक कद बढ़ेगा और सहयोगी दलों के साथ उसकी सौदेबाजी की ताकत भी बढ़ेगी।
अगर भाजपा हार गई तो फिर सवाल उठेंगे।
यदि भाजपा दिल्ली में चुनाव हार जाती है तो इसका असर पार्टी की राज्य इकाई पर पड़ेगा। मोदी और शाह के केन्द्रीय राजनीति में आने के बाद भाजपा दिल्ली चुनाव नहीं जीत सकी। एक सवाल जो मोदी-शाह की जोड़ी पर लक्षित होगा वह यह है कि भाजपा उनके कार्यकाल में दिल्ली नहीं जीत सकी। अगर भाजपा हारती है तो वह लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीतने और दिल्ली की सभी सातों लोकसभा सीटें जीतने के बाद भी दिल्ली की सत्ता से दूर रहेगी। दिल्ली में भाजपा का राजनीतिक वनवास पांच साल और बढ़ जाएगा। इसके अलावा भाजपा के पास केजरीवाल की नीतियों को तोड़ने की ताकत नहीं है।

विपक्ष महाराष्ट्र-हरियाणा में भाजपा की जीत को धांधली वाली जीत बताना शुरू कर देगा। यह कहा जाएगा कि भाजपा ने कांग्रेस को हरा दिया, लेकिन क्षेत्रीय दलों के सामने भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जनता को भाजपा से ज्यादा केजरीवाल की रोवाड़ी पसंद है। यह कहा जाएगा कि जनता वादों की अपेक्षा, पहले से ही मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही चीजों पर अधिक भरोसा करती है। अगर इस बार भी भाजपा नहीं जीत पाई तो इसका मतलब यह होगा कि आम आदमी का अरविंद केजरीवाल पर भरोसा अभी भी कायम है।

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