उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े सवाल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने सियासी बहस को और गरमा दिया है। सोमवार (16 मार्च) को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने इस विवाद पर अपनी राय रखी और सवाल उठाने वालों पर भी निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने कहा कि, “ये सवाल आप इसलिए पूछ रहे हो क्योंकि आपको गोरखपुर के बारे में नहीं पता है.” उन्होंने आगे कहा कि, “‘हाता नहीं भाता’. ये पहली बार नहीं हुआ है. फिल्म बनी थी, याद कीजिए कितना अपमानित होना पड़ा था. उस समय पर भी आवाज उठी थी. पूजनीय शंकराचार्य का कितना अपमान हुआ? जिन्हें ‘हाता नहीं भाता’ वो समय समय पर इसी तरह समाज के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं.”
चुनाव आयोग और अधिकारियों के तबादले पर भी उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा कई अधिकारियों के ट्रांसफर किए जाने पर भी सपा प्रमुख ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी के चुनाव लड़ने का तरीका रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी इसी तरह अधिकारियों के तबादले किए गए थे।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी बंगाल में चुनाव आयोग के जरिए माहौल और दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बंगाल की जनता ममता बनर्जी को भारी मतों से ऐतिहासिक जीत दिलाएगी।
कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग पर क्या बोले
बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा, “सब चाहते हैं कि उन्हें भारत रत्न मिले.”
फिलहाल SI परीक्षा के सवाल को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।