अयोध्या की मिल्कीपुर में क्यों टली वोटिंग? यूपी में दस में से नौ सीटों पर ही होगा उपचुनाव

चुनाव आयोग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश में उपचुनाव का ऐलान कर दिया है। यूपी में दस विधानसभा सीटें खाली हैं लेकिन नौ सीटों पर ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया है। अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर चुनाव का ऐलान नहीं हुआ है।
चुनाव आयोग के अनुसार मिल्कीपुर में भी चुनाव प्रस्तावित है लेकिन तारीखों का ऐलान इलेक्शन पिटिशन के कारण नहीं हो रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा है कि जिन सीटों पर उप चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है उनको लेकर इलेक्शन पिटिशन यानी मामला कोर्ट में पहुंचा हुआ है। अयोध्या की मिल्कीपुर पर भी इलेक्शन पेटिशन पेंडिंग है इसलिए चुनाव वाली सीटों में यहां का नाम नहीं है।बताया जा रहा है कि बीजेपी के पूर्व विधायक गुरुु गोरखनाथ ने 2022 में चुनाव जीते सपा विधायक अवधेश प्रसाद के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर कर रखी है, जो अभी लंबित है। फॉर्म भरते वक्त शपथ से जुड़ा यह मामला है।यूपी में विधानसभा उपचुनाव की तारीख घोषित, 13 को वोटिंग, 23 नवंबर को नतीजेगुरु गोरखनाथ के अनुसार 2022 में सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने जिस नोटरी से हलफनामा बनवाया था, उसका लाइसेंस पहले ही निरस्त हो चुका था। इसी आधार पर निर्वाचन को अवैध बताते हुए याचिका दाखिल की थी।मीडिया से बात करते हुए गोरखनाथ ने कहा कि एमएलसी अनूप गुप्ता केस का आधार बनाते हुए यह रिट दाखिल की थी। पहले भी ऐसे गलत डॉक्यूमेंट दाखिल हुए और पर्चा रद्द हुआ। लखनऊ हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है।मिल्कीपुर के 2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद को एक लाख तीन हजार वोट मिले थे। भाजपा के बाबा गोरखनाथ को 90 हजार 567 वोट मिले थे। इससे पहले 2017 के चुनाव में बाबा गोरखनाथ मिल्कीपुर से विधायक बने थे।अयोध्या में लोकसभा चुनाव हारने के बाद से सभी की नजरें मिल्कीपुर सीट पर ही लगी थीं। राम मंदिर निर्माण के बाद हुए पहले ही चुनाव में भाजपा की यहां हार चर्चा का विषय बनी हुई है। सपा ने भी इसका भरपूर फायदा उठाया है। यहां से चुने गए सांसद अवधेश प्रसाद को लोकसभा में सबसे आगे की सीट पर जगह दी है। मिल्कीपुर में भी अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत को उतारकर अपने मंसूबे भी साफ कर दिए थे। वैसे मिल्कीपुर सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ ही मानी जाती है। राम मंदिर आंदोलन के बाद से बीजेपी यहां केवल दो बार ही जीत हासिल कर सकी है। जबकि छह बार सपा और दो बार बसपा से विधायक रहे हैं।

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