
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उप प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिया जाएगा। देश का सबसे बड़े सम्मान पाने वाले आडवाणी सबसे लंबे समय तक भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं।आडवाणी लगभग तीन दशक तक संसद में चुनकर आते रहे। आडवाणी भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। 8 नवंबर, 1927 को सिंध (अब पाकिस्तान में) में जन्मे आडवाणी कराची के सेंट पैट्रिक स्कूल के छात्र रहे हैं। देशभक्तिपूर्ण आदर्शों ने उन्हें 1942 में 14 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।लाल कृष्ण आडवाणी को व्यापक रूप से महान बौद्धिक क्षमता, मजबूत सिद्धांतों और एक मजबूत और समृद्ध भारत के विचार के प्रति अटूट समर्थन रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। आडवाणी के बारे में जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा, “आडवाणी जी ने राष्ट्रवाद में अपने मूल विश्वास से कभी समझौता नहीं किया है और फिर भी जब भी स्थिति की मांग हुई उन्होंने राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में लचीलापन दिखाया है।”
स्कूली शिक्षा और करियर
लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी स्कूली शिक्षा कराची के सेंट पैट्रिक हाई स्कूल में की। उन्होंने 1936 से 1942 तक 6 वर्षों तक वहां अध्ययन किया। भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान वे दयाराम गिदुमल नेशनल कॉलेज, हैदराबाद (अब पाकिस्तान में) में शामिल हो गए। 1944 में उन्होंने कराची में मॉडल हाई स्कूल में शिक्षक के रूप में नौकरी की।
सियासी सफर
1947 में विभाजन के बाद आडवाणी दिल्ली चले आए और राजस्थान में आरएसएस के प्रचारक बन गए। 1947 से 1951 तक उन्होंने कराची शाखा में आरएसएस सचिव के रूप में अलवर, भरतपुर, कोटा, बूंदी और झालावाड़ में आरएसएस कार्य का आयोजन किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा जनसंघ के गठन के बाद आडवाणी 1951 में इस पार्टी से जुड़े। उन्हें राजस्थान में पार्टी की इकाई का सचिव नियुक्त किया गया। 1957 की शुरुआत में – अटल बिहारी वाजपेयी की सहायता के लिए उन्हें दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया। वह 1970 में राज्य सभा के सदस्य बने और 1989 तक इस सीट पर रहे। दिसंबर 1972 में वह भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष चुने गए।
आडवाणी ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ 1980 में भाजपा की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह भाजपा की आक्रामक और जुझारू हिंदुत्व विचारधारा के चेहरे के रूप में उभरे। उन्होंने 1990 के दशक में वाजपेयी के साथ पार्टी के उत्थान की योजना बनाई और भाजपा को 1984 में दो संसदीय सीटों से 1992 में 121 सीटों और 1996 में 161 सीटों तक पहुंचाया। 1996 के चुनावों के दौरान भारतीय लोकतंत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब भाजपा लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
लाल कृष्ण आडवाणी को 1975 में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री नियुक्त किया गया था। उन्होंने 1998 और 1999 में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री और 2002 में उप प्रधानमंत्री के रूप में भी कार्य किया।
राम जन्मभूमि आंदोलन
1990 के दशक में वह राम जन्मभूमि आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे। राम रथ यात्रा 25 सितंबर, 1990 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर सोमनाथ से शुरू हुई थी और 10,000 किमी की यात्रा के बाद 30 अक्टूबर को अयोध्या में समाप्त होनी थी। यात्रा का मकसद राम मंदिर निर्माण के अभियान के लिए समर्थन हासिल करना था।
पुरस्कार
लाल कृष्ण आडवाणी को साल 1999 में भारतीय संसदीय समूह द्वारा उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साल 2015 में भारत सरकार की तरफ से उन्हें पद्म विभूषण से भी नवाजा गया।
लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा लिखी गई पुस्तकें
मेरा देश मेरा जीवन (2008)
एक कैदी की स्क्रैपबुक (1978)
नजरबंद लोकतंत्र (2003)
सुरक्षा और विकास के नये दृष्टिकोण (2003)
जैसा कि मैंने इसे देखा (2011)
माई टेक (2021)