UP Panchayat Election 2026: यूपी में 3 महीने के अंदर होंगे पंचायत चुनाव? हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, प्रधानों पर भी आया फैसला

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य में तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपना काम जारी रखेंगे। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव से संबंधित 11 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इन याचिकाओं में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने और समय पर चुनाव कराने से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।

यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का आदेश, सरकार को तीन महीने की समयसीमा

पंचायत चुनाव से जुड़ी कुल 11 याचिकाओं में छह जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं। याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार के 25 मई 2026 के उस शासनादेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था।

इन मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार, निदेशक पंचायती राज, जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों और जिला पंचायती राज अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था। करीब तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वहीं, निवर्तमान ग्राम प्रधान चुनाव संपन्न होने तक प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे।

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का शासनादेश वैध

अदालत ने राज्य सरकार के 25 मई 2026 के शासनादेश को वैध माना है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल के मुताबिक, जिन याचिकाओं में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई थी, उन्हें हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी अदालत ने निरस्त कर दी हैं।

सरकार की ओर से कहा गया कि संबंधित अधिनियम में समय पर पंचायत चुनाव नहीं हो पाने की स्थिति में प्रशासक नियुक्त करने का प्रावधान है। इसी व्यवस्था के तहत निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया था।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासकों की नियुक्ति के बावजूद चुनाव कराने की जिम्मेदारी सरकार और निर्वाचन आयोग की है। चुनाव के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने होंगे और निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

OBC कमीशन की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जताया था असंतोष

पंचायत चुनाव से संबंधित सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC कमीशन की रिपोर्ट पर भी असंतोष जताया था। इससे पहले शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने टिप्पणी की थी कि रिपोर्ट जमीनी स्तर पर जाकर तैयार करने के बजाय कार्यालय में बैठकर तैयार की गई है।

हालांकि, ताजा फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि OBC कमीशन अपना काम जारी रखेगा और उसके कामकाज में कोई बाधा नहीं आएगी। लेकिन पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया को कमीशन के काम पर निर्भर नहीं रखा जाएगा।

27 फीसदी आरक्षण के प्रावधान के तहत होंगे चुनाव

हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायत चुनाव मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे। खबर के मुताबिक, चुनाव में 27 फीसदी आरक्षण के प्रावधान को भी लागू किया जाएगा। अदालत ने चुनावी प्रक्रिया को OBC कमीशन के काम से अलग रखते हुए मौजूदा नियमों के आधार पर आगे बढ़ाने की बात कही है।

याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन के अनुसार, अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों को तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। उनके मुताबिक, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

यूपी पंचायत चुनाव 2026: अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित होगा। राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को चुनाव संपन्न कराने के लिए जरूरी संसाधन और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी। इस बीच निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे।

फैसले का मुख्य बिंदु यह है कि प्रशासकों की नियुक्ति को अदालत ने वैध माना है, लेकिन पंचायत चुनाव कराने के लिए तीन महीने की समयसीमा तय की है। अब चुनाव की तारीखों और कार्यक्रम से संबंधित अगली जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी की जाने वाली अधिसूचनाओं पर निर्भर करेगी।

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