चीन से लौटते ही ट्रंप का बड़ा संकेत, क्या ईरान पर फिर बरसेंगे अमेरिकी मिसाइलें?

Donald Trump के चीन दौरे से लौटने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी संकट के बीच अब अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर सकता है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ सलाहकारों ने ईरान को लेकर नई सैन्य रणनीति तैयार की है। बताया जा रहा है कि अगर कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह विफल होते हैं तो अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य हमले शुरू कर सकता है।

“ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” फिर शुरू करने की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार पेंटागन अधिकारी “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को दोबारा शुरू करने की तैयारी में जुटे हैं। यह वही ऑपरेशन है जिसे पिछले महीने युद्धविराम की घोषणा के बाद रोक दिया गया था। अब इसे नए नाम और नई रणनीति के साथ फिर सक्रिय किया जा सकता है।

हालांकि अब तक राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के भीतर सैन्य विकल्पों पर गंभीर चर्चा जारी है।

ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को किया खारिज

बीजिंग से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, “मैंने प्रस्ताव देखा और अगर मुझे पहली लाइन ही पसंद नहीं आती, तो मैं उसे फेंक देता हूं.”

ट्रंप के इस बयान को ईरान के प्रति अमेरिकी रुख के और सख्त होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

शी जिनपिंग के साथ बैठक में उठा ईरान का मुद्दा

Xi Jinping के साथ हुई बैठक में भी ईरान और मध्य पूर्व संकट पर चर्चा हुई। हालांकि ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने चीन से ईरान पर दबाव बनाने की कोई मांग नहीं की।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, ईरान का बड़ा रणनीतिक साझेदार है और उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाली तेल और गैस सप्लाई पर निर्भर करता है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

इसी वजह से कई देश इस संकट को खत्म कराने और समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हुए हैं।

अमेरिका कूटनीतिक जीत भी चाहता है

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ऐसा समझौता चाहता है जिसे ट्रंप घरेलू राजनीति में बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकें। इसका मकसद अमेरिकी मतदाताओं को यह भरोसा दिलाना भी है कि अमेरिका किसी लंबे और महंगे युद्ध में नहीं फंसेगा।

हालांकि हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कांग्रेस में बयान देते हुए कहा, “जरूरत पड़ने पर हमारे पास संघर्ष बढ़ाने की योजना तैयार है.”

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास मध्य पूर्व में तैनात 50 हजार से ज्यादा सैनिकों की संख्या धीरे-धीरे कम करने की योजना भी मौजूद है।

अगले सप्ताह हो सकते हैं बड़े फैसले

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी और इजरायली अधिकारी अगले सप्ताह ईरान के खिलाफ संभावित नई सैन्य कार्रवाई की तैयारियों पर चर्चा कर सकते हैं। मध्य पूर्व के अधिकारियों ने इसे युद्धविराम के बाद की “सबसे बड़ी तैयारी” बताया है।

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