NEET विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर योगी सरकार के मंत्री का जवाब, बोले- ‘दोषी नहीं तो इस्तीफा क्यों दें?’

नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री Yogendra Upadhyay ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब किसी मामले में मंत्री की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, तो इस्तीफे का कोई औचित्य नहीं बनता।

कानपुर के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान योगेंद्र उपाध्याय ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा और कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

इस्तीफे की मांग को बताया बेबुनियाद

योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में जिन लोगों की भूमिका सामने आई है, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है और कानून अपना काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, “जो दोषी थे उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है. इसमें मंत्री का क्या दोष है, वो इस्तीफा क्यों दें?”

मंत्री ने तर्क दिया कि किसी घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होना जरूरी है, न कि बिना कारण किसी मंत्री से इस्तीफे की मांग करना।

पेपर लीक की घटनाओं में कमी का दावा

उपाध्याय ने दावा किया कि वर्तमान सरकार के दौरान परीक्षा प्रणाली में सुधार हुआ है और पेपर लीक जैसी घटनाओं में पहले की तुलना में काफी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि यदि पहले 100 मामलों की चर्चा होती थी तो अब उदाहरण के तौर पर केवल 10 मामले सामने आ रहे हैं, जो व्यवस्था में सुधार का संकेत है। उनके अनुसार, सरकार लगातार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है।

विपक्ष पर साधा निशाना

मंत्री ने विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के लिए शिक्षा जैसे संवेदनशील विषयों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विपक्ष इतना कमजोर हो चुका है कि वह ऐसे संगठनों और अभियानों के पीछे खड़ा दिखाई दे रहा है जिनकी कोई स्पष्ट राजनीतिक या वैचारिक पहचान नहीं है। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का भी आरोप लगाया।

‘दोषियों को संरक्षण नहीं, सजा मिल रही है’

योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान सरकार और पूर्ववर्ती सरकारों के कामकाज में बड़ा अंतर है। उनके अनुसार, पहले कई मामलों में दोषियों को संरक्षण मिलता था, जबकि अब कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।

उन्होंने कहा, “दाढ़ी वाला हत्या करे और मूंछ वाले को पकड़ लिया जाए, ऐसा नहीं हो सकता. केंद्रीय मंत्री इसमें शामिल नहीं थे. यदि शामिल होते तो निश्चित रूप से जेल जाते.”

मंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी दोषी को बचाने के पक्ष में नहीं है और जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं।

मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं

बातचीत के दौरान योगेंद्र उपाध्याय ने केंद्र की मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 की तुलना में भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हुई है।

मंत्री के अनुसार, भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ा है और कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण तथा केदारनाथ-बद्रीनाथ क्षेत्र के विकास जैसे कार्यों का भी उल्लेख किया।

शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता पर जोर

योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्ष बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।

मंत्री का कहना था कि छात्रों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है और भविष्य में भी परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

आर्थिक चुनौतियों से निपटने को तैयार सरकार

संभावित वैश्विक आर्थिक मंदी के सवाल पर उपाध्याय ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर खड़ी है और सरकार किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश आर्थिक मोर्चे पर मजबूती बनाए रखेगा और विकास की गति आगे भी जारी रहेगी।

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