छोटे केस छोड़ें, बड़े मामलों पर लगाएं एनर्जी.., हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन की अवहेलना मामले में घिरे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी अंतरिम राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत (स्पेशल MP/MLA कोर्ट) में चल रही कार्यवाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत ने ईडी को बड़े ही हल्के-फुल्के लेकिन चुटीले अंदाज में नसीहत देते हुए कहा कि एजेंसी को अपना ध्यान ‘बड़े मामलों’ पर केंद्रित करना चाहिए।

‘हम अखबार में पढ़ रहे थे… बड़े केस पर ध्यान दीजिए’

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई करते हुए ईडी को नोटिस जारी किया। CJI सूर्य कांत ने ईडी के वकील से कहा, “यह एक छोटा मामला है। कल हम अखबार में पढ़ रहे थे कि ईडी ने बहुत सारे केस दर्ज किए हैं। बेहतर होगा कि आप उन पर ध्यान दें और अपनी एनर्जी बड़े मामलों पर लगाएं, जिससे आपको सकारात्मक परिणाम मिल सकेंगे।”

कोर्ट में ED बनाम मुकुल रोहतगी: किसने क्या कहा?

  • ED की दलील: प्रवर्तन निदेशालय के वकील ने अदालत में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए 7 बार समन भेजा गया था, लेकिन उन्होंने इसकी लगातार अवहेलना की और पेश नहीं हुए।
  • हेमंत सोरेन का बचाव: झारखंड सीएम की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने ईडी के दावों को काटते हुए कहा कि सोरेन जांच में शामिल होने के लिए तीन बार पेश हुए थे, लेकिन एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

क्या है यह पूरा मामला और क्यों जारी हुआ था समन?

  • जमीन घोटाला: ईडी ने हेमंत सोरेन के एक करीबी सहयोगी के पास से मुख्यमंत्री की 8.86 एकड़ जमीन के दस्तावेज बरामद किए थे। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
  • गिरफ्तारी और IPC 174: पूछताछ के लिए समन पर पेश न होने के कारण ईडी ने 31 जनवरी 2024 को सोरेन को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद रांची के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) ने ‘समन की अवहेलना’ करने पर उनके खिलाफ IPC की धारा 174 के तहत समन जारी किया था।
  • हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत: सोरेन ने इस कार्यवाही को रद्द करने के लिए पहले झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि यह ट्रायल का विषय है। अब अंततः सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।

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