कौन बनेगा ओडिशा का नया मुख्यमंत्री, धर्मेंद्र प्रधान से लेकर संबित पात्रा तक रेस में; कल होगा ऐलान

डिशा में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की है। अब राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसकी जानकारी शनिवार को हो जाएगी। मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस के बीच राज्य में भाजपा के एक वरिष्ठ आदिवासी विधायक ने शुक्रवार को कहा कि 78 सदस्यीय विधायक दल शनिवार को बैठक कर नाम की घोषणा करेगा।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संबित पात्रा आदि के नामों पर चर्चा हुई है। संबलपुर जिले के कुचिंडा से वरिष्ठ विधायक रविनारायण नाइक ने शुक्रवार को कहा कि राज्य विधायक दल भुवनेश्वर में बैठक करेगा और 10 जून को भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले नाम की घोषणा करेगा।

नाइक ने कहा, “संसदीय दल शुक्रवार को नए मुख्यमंत्री पर फैसला ले सकता है और शनिवार को औपचारिक घोषणा की जाएगी।” उम्मीदवारों के चयन से लेकर सरकार गठन और मुख्यमंत्री के चयन तक सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर भाजपा संसदीय बोर्ड निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। ओडिशा के सभी 20 भाजपा सांसदों से शीर्ष नेतृत्व ने सलाह ली है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि पिछले 2-3 दिनों से जिन नामों पर विचार किया जा रहा है, उनमें पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पूर्व केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री जुएल ओराम, पुरी के नवनिर्वाचित सांसद संबित पात्रा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और केंद्रपाड़ा के सांसद बैजयंत पांडा और पश्चिमी ओडिशा के वरिष्ठ नेता सुरेश पुजारी प्रमुख हैं। सभी नामों में से केवल पुजारी ही विधायक हैं, जो बाराराजनगर विधानसभा क्षेत्र से जीते हैं।

शपथ ग्रहण समारोह में 30 हजार से ज्यादा लोग होंगे शामिल
भुवनेश्वर के जनता मैदान में आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में 30,000 से ज्यादा लोग शामिल होंगे। राज्य सरकार ने नए मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह की निगरानी के लिए 9 आईएएस, एक ओएफएस और 40 अन्य वरिष्ठ ओएएस अधिकारियों सहित 50 वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त करने का फैसला किया है। भाजपा नेता और प्रवक्ता सज्जन शर्मा ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ एनडीए शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे, जिन्होंने ओडिशा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार किया था। ओडिशा में हाल में हुए चुनाव में बीजू जनता दल (बीजेडी) की हार हुई है, जिसके बाद नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और इस तरह उनके 24 साल के शासन का अंत हो गया। भाजपा ने 147 सदस्यीय विधानसभा में 78 सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि बीजेडी को 51 और कांग्रेस को 14 सीट मिली हैं।

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