
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से कथित मारपीट मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सीएम केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता को लगातार मिल रही हैं।यह दूसरी जमानत याचिका है जिसे कोर्ट ने खारिज किया है। इससे पहले 27 मई को उनकी पहली नियमित जमानत याचिका खारिज की गई थी।शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने यह कहा कि इस बात की भी पूरी आशंका है कि अगर कुमार को जमानत मिली तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि मालीवाल को लगी चोटें एमएलसी के अनुसार स्पष्ट थीं और कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर और संगीन प्रकृति के थे।
इसके अलावा कोर्ट ने कहा, ‘इस तथ्य पर विचार करते हुए कि आवेदक/आरोपी बिभव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर राजनीतिक दल की एक महिला सदस्य के साथ दुर्व्यवहार किया, जहां न केवल उनके राजनीतिक दल के निर्वाचित सदस्य माननीय मुख्यमंत्री से मिल सकते थे, बल्कि आम जनता भी अपनी शिकायतों के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री से मिल सकती थीं। इससे आम जनता के मन में अपने नेता से मिलने के लिए डर और घबराहट पैदा होती है।’
बिभव कुमार फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। 27 मई को बिभव की जमानत याचिका खारिज करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील अनुज त्यागी ने कहा था कि, ‘पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता है। केवल प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी से मामले पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि चार दिनों के बाद भी मेडिकल रिपोर्ट में चोटें स्पष्ट रूप से दर्ज हुई हैं।’
केजरीवाल के निजी सहायक बिभव कुमार ने 13 मई को मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। इस प्रकरण में घटना वाले दिन मुख्यमंत्री आवास के कुछ वीडियो भी बाद में सोशल मीडिया पर सामने आए थे, जिनमें से एक में मालीवाल को सुरक्षाकर्मियों के साथ बहस करते हुए दिख रही थीं, जबकि दूसरे में वह सिविल लाइंस में मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकलती दिखाई दे रही थीं।
इस मामले में बिभव के खिलाफ 16 मई को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी। इसके दो दिन बाद 18 मई को उन्हें गिरफ्तार किया गया था और उसी दिन मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद 24 मई को उन्हें चार दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। हालांकि इसके बाद 31 मई को अदालत ने यह कहते हुए बिभव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और इसे पूरा करने में समय लगेगा।