पंजाब के कई इलाकों में जानलेवा बीमारी एचआईवी (HIV) का खतरा खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राज्य में सामने आ रहे नए मामले स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संक्रमण के फैलने की दो सबसे बड़ी वजहें सामने आई हैं- पुरुषों के बीच असुरक्षित यौन संबंध (होमोसेक्सुअल रिश्ते) और नशे के लिए एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल करना। लुधियाना, अमृतसर, बठिंडा और जालंधर समेत राज्य के 10 जिले इस बीमारी की गिरफ्त में सबसे ज्यादा हैं, जहां संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
एक साल में मिले 11 हजार से ज्यादा नए मरीज
आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2024-25 के दौरान पंजाब में एचआईवी संक्रमण की दर 1.19 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस अवधि में राज्य में कुल 11,364 नए पॉजिटिव मरीज मिले हैं। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में संक्रमण दर में थोड़ी गिरावट जरूर दिखी है, लेकिन मरीजों की संख्या अभी भी डराने वाली है। साल 2023-24 में यह दर 1.74 प्रतिशत थी और 13,130 मरीज मिले थे, जबकि 2022-23 में 11,950 मामले सामने आए थे। पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने बीमारी पर काबू पाने के लिए टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ा दी है। साल 2024-25 में रिकॉर्ड 9,51,521 लोगों की जांच की गई, जो पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक है।
समलैंगिक संबंध और नशे की सुई बनी बड़ा कारण
पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के एडिशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. विशाल गर्ग ने संक्रमण के बदलते पैटर्न पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पंजाब में एचआईवी मरीज बढ़ने का एक प्रमुख कारण होमोसेक्सुअल रिश्तों की संख्या में हो रही वृद्धि है। उन्होंने बताया कि पहले यह बीमारी मुख्य रूप से महिला और पुरुष के बीच असुरक्षित संबंधों से फैलती थी, लेकिन जब से समलैंगिक रिश्तों को कानूनी और सामाजिक दायरा मिला है, पुरुषों के पुरुषों के साथ संबंधों के चलते एचआईवी के मामले बढ़े हैं। इसके अलावा, संक्रमण का दूसरा सबसे बड़ा कारण नशा करने वाले लोग हैं, जो एक ही संक्रमित सुई (Syringe) का इस्तेमाल बार-बार करते हैं, जिससे यह वायरस एक शरीर से दूसरे शरीर में आसानी से पहुंच जाता है।
रात के अंधेरे में ‘मूनलाइट वैन’ कर रही इलाज
इस संकट से निपटने के लिए अब विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। पंजाब के तीन सबसे प्रभावित जिलों- लुधियाना, मोगा और अमृतसर में एक खास पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। दिल्ली की एक स्वयंसेवी संस्था ‘मूनलाइट वैन’ के जरिए लोगों तक पहुंच रही है। यह वैन रात के समय उन हाई-रिस्क लोगों की काउंसलिंग और टेस्टिंग करती है, जो दिन में अपनी नौकरी या शर्म के कारण जांच नहीं करा पाते। यह टीम सीधे लोगों के घरों के पास जाकर उन्हें न केवल सलाह दे रही है, बल्कि मुफ्त दवाइयां भी उपलब्ध करवा रही है।