G RAM G अब बना देश का नया कानून, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बिल को दी मंजूरी, मनरेगा की जगह अब मिलेंगे 125 दिन काम

नई दिल्ली: देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G विधेयक 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही अब ‘मनरेगा’ (MGNREGA) का अस्तित्व समाप्त हो गया है और इसकी जगह ‘जी राम जी’ (G RAM G) कानून ने ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन के तहत लाया गया यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का दावा करता है।

100 नहीं, अब साल में मिलेंगे 125 दिन रोजगार

इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार गारंटी की अवधि में बड़ा इजाफा किया गया है। जहां मनरेगा में एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के काम का प्रावधान था, वहीं G RAM G कानून के तहत अब हर ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। सरकार का तर्क है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय सुरक्षा मजबूत होगी और पलायन पर लगाम लगेगी।

राज्यसभा में 6 घंटे के संग्राम के बाद मिली हरी झंडी

संसद के दोनों सदनों में इस बिल को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला था। गुरुवार को राज्यसभा में इस पर करीब 6 घंटे तक तीखी बहस हुई। विपक्ष ने ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और कई संशोधन प्रस्ताव पेश किए, जिन्हें सदन ने ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा:

“कांग्रेस ने हमेशा बापू के नाम का राजनीतिकरण किया, जबकि मोदी सरकार उनके आदर्शों को हकीकत में जमीन पर उतार रही है। यह बिल ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।”

क्या-क्या बदला? ‘जी राम जी’ बिल की मुख्य बातें

‘G RAM G’ कानून केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई बुनियादी बदलाव किए गए हैं:

  • रोजगार की अवधि: कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन की गई।
  • कृषि उत्पादकता पर जोर: इस योजना को कृषि कार्यों और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण से सीधे जोड़ा गया है।
  • योजनाओं का एकीकरण: ग्राम विकास से जुड़ी अन्य सरकारी योजनाओं को इस मिशन के साथ इंटीग्रेट (एकीकृत) किया गया है।
  • श्रमिक सुरक्षा: काम के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर ही नियोजन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
  • पर्यावरण संरक्षण: जल संरक्षण और वनीकरण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधन समृद्ध हों।

सरकार का मानना है कि यह नया ढांचा न केवल मजदूरी के अवसर बढ़ाएगा बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक बनाएगा। हालांकि, विपक्ष इसे योजना को ‘कमजोर’ करने की कोशिश बता रहा है, जिसे लेकर राजनीतिक घमासान जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *