
जन सुराज अभियान के संस्थापक और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा है कि एक देश एक चुनाव को सही नीयत से किया जाए तो ये ठीक है लेकिन रातों-रात इसे लागू करने में दिक्कत आ सकती है।
पीके ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन के लिए चार-पांच साल का ट्रांजिशन टाइम रहे तो सबको नई व्यवस्था में आने का समुचित समय मिलेगा जो देश हित में होगा। जन सुराज पदयात्रा कर रहे प्रशांत किशोर ने सोमवार को कहा कि पहले भी देश में 17-18 सालों तक केंद्र और राज्य के चुनाव एक साथ होते थे।
लंबे समय तक बीजेपी से लेकर कांग्रेस और जेडीयू से लेकर टीएमसी के साथ चुनावी प्रबंधन का काम कर चुके प्रशांत किशोर ने कहा कि हर साल भारत का एक चौथाई हिस्सा वोट करता है। ऐसे में सरकार चला रहे लोग कभी इस राज्य में तो कभी उस राज्य मे ंचुनाव में फंसे रहते हैं। अगर देश भर के चुनाव को एक या दो बार में किया जाए तो बेहतर होगा। इससे खर्च बचेगा और जवाबदेही भी तय होगी। पीके ने कहा कि इससे जनता को भी एक बार निर्णय करने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि 1967 के बाद करीब-करीब 50 वर्षों में यह व्यवस्था बनी है तो इसको ओवरनाइट बदलेंगे तो उसमें दिक्कत आ सकती है। उन्होंने कहा कि अभी सरकार शायद बिल ला रही है, बिल आने दीजिए। अगर, सरकार की नीयत सही में ठीक है तो एक देश एक चुनाव होना चाहिए, इससे देश को फायदा है।
मुजफ्फरपुर में पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि मान लीजिए कि आप आतंकवाद निरोधक कोई कानून लाते हैं, कानून लाना तो अच्छी बात है। आतंकवाद रुकना चाहिए, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन आप उस कानून का इस्तेमाल किसी वर्ग विशेष या समाज विशेष को प्रताड़ित करने के लिए करते हैं तो इसे सही नहीं ठहराया जा सकता है। किस नीयत से सरकार ला रही है, कितनी ईमानदारी से इसे लागू करती है, सब इस पर निर्भर करता है। प्रशांत किशोर ने कहा कि इलेक्शन रोज न होकर अगर एक बार या दो बार होगा तो उससे देश का आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक फायदा है।