केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करते हुए प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार देने के निर्देश दिए हैं।
इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी घोषणा की है कि केंद्र सरकार द्वारा शनिवार, 25 जुलाई 2026 को संगठन की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद नीट विवाद को लेकर चलाया जा रहा उसका आंदोलन समाप्त किया जा रहा है।
पहले से कई अहम मंत्रालय संभाल रहे हैं प्रह्लाद जोशी
प्रह्लाद जोशी फिलहाल केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हैं। अब इन जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालेंगे और मंत्रालय के प्रशासनिक एवं नीतिगत कार्यों की निगरानी करेंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी नेता भी माना जाता है।
हाल ही में राहुल गांधी पर साधा था निशाना
दो दिन पहले, 23 जुलाई को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के प्रत्येक छात्र के भविष्य की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि प्रश्न पत्र लीक की घटनाएं सामने आने पर केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं।
CJP की थीं ये प्रमुख मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट पेपर लीक विवाद को लेकर कई मांगें रखी थीं। इनमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, नीट विवाद के बाद कथित रूप से आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने तथा 20 मार्च को आयोजित संगठन के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की मांग शामिल थी।
इस्तीफे के बाद छात्रों ने मनाया जश्न
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं ने खुशी जताई। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने लंबे आंदोलन की पहली बड़ी सफलता बताया।
छात्रों का कहना है कि यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल इस्तीफा नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना है।