संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत के रिश्तों की गर्मजोशी एक बार फिर दिल्ली के एयरपोर्ट पर देखने को मिली। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान जब भारत की धरती पर उतरे, तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके स्वागत के लिए वहां मौजूद थे। प्रोटोकॉल से परे जाकर पीएम मोदी ने न केवल उनकी अगवानी की, बल्कि उन्हें गले लगाकर (हग) उनका शानदार स्वागत किया। यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि शेख मोहम्मद बिन जायद का यह आगमन ऐसे वक्त में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर सऊदी अरब और यूएई के बीच कूटनीतिक तनाव की खबरें सुर्खियों में हैं।
‘मेरे भाई का स्वागत है’ – पीएम मोदी का संदेश
राष्ट्रपति के आगमन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी खुशी जाहिर की। रिश्तों की गहराई को बयां करते हुए उन्होंने लिखा, “मैं अपने भाई, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट गया. उनकी यह यात्रा भारत और UAE के बीच दोस्ती के मज़बूत रिश्तों को जो अहमियत दी जाती है, उसे दिखाती है. मैं हमारी बातचीत का इंतज़ार कर रहा हूं.”
10 साल में चौथी बार भारत आए नाहयान
शेख मोहम्मद बिन जायद का भारत से पुराना लगाव रहा है। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी तीसरी आधिकारिक भारत यात्रा है, जिसके लिए उन्हें पीएम मोदी ने विशेष रूप से आमंत्रित किया था। पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो वह चार बार भारत आ चुके हैं। दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय यात्राओं का सिलसिला लगातार जारी है। इससे पहले सितंबर 2025 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन जायद अल नाहयान और अप्रैल 2025 में यूएई के उप प्रधानमंत्री प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने भी भारत का दौरा किया था।
भारत की तरक्की में अरबों डॉलर का निवेश
भारत और यूएई के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद मजबूत नींव पर टिके हैं। यूएई भारत में विदेशी निवेश (FDI) लाने वाला सातवां सबसे बड़ा देश बन चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2000 से लेकर अब तक यूएई ने भारतीय बाजार में 22 अरब डॉलर से ज्यादा की पूंजी का निवेश किया है, जो देश के विकास कार्यों को गति दे रहा है।
व्यापार और ऊर्जा में अहम साझेदार
दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते लागू हैं जो इस दोस्ती को और गहरा करते हैं। इनमें व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA), स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS) सिस्टम और द्विपक्षीय निवेश संधि प्रमुख हैं। इसके अलावा, ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं, जिसमें लॉन्ग टर्म फ्यूल सप्लाई जैसे एग्रीमेंट शामिल हैं। यह यात्रा इन रणनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगी।