पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की। इस वार्ता में मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते खतरों को लेकर गंभीर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा ठिकानों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की और क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर जोर दिया। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए साझा की।
पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण पश्चिमी एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे हालात में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बातचीत को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। खासतौर पर क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भारत की चिंता प्रमुख रही।
दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों की निर्बाध आवाजाही बनाए रखने पर सहमति जताई। वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित होने से बचाने के लिए समुद्री मार्गों और शिपिंग लाइनों को सुरक्षित और खुला रखना जरूरी बताया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल परिवहन को देखते हुए यह मुद्दा चर्चा का प्रमुख केंद्र रहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताई गहरी चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया, ‘मैंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से क्षेत्रीय गंभीर स्थिति पर चर्चा करने के लिए बातचीत की. मैंने तनाव बढ़ने, नागरिकों की जान जाने और नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की.’ उन्होंने सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए दिए जा रहे सहयोग पर आभार भी व्यक्त किया।
ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की भारत ने की निंदा
पीएम मोदी ने अपने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘मैंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर चर्चा की. मैंने क्षेत्रीय ऊर्जा और नागरिक ढांचों पर हमलों की भारत की निंदा को दोहराया. हम नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और शिपिंग लाइन को खुला और सुरक्षित रखने की जरूरतों पर सहमत हुए. मैंने सऊदी अरब में भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए उनके निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया.’
इस बातचीत को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब पश्चिमी एशिया का संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है।