नोएडा में इंजीनियर की दर्दनाक मौत पर बड़ा एक्शन, नामजद बिल्डर गिरफ्तार, SIT ने संभाला मोर्चा

ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस प्रशासन ने पहली बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने एफआईआर में नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किया गया आरोपी एमजेड विश्टाउन (MZ Wishtown) का मालिक बताया जा रहा है। पुलिस की यह कार्रवाई यहीं नहीं रुकी है, बल्कि लोटस ग्रीन कंपनी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रशासन के इस सख्त रवैये से साफ है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

SIT ने शुरू की जांच, परिवार से भी मिली टीम

हादसे की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने मंगलवार से अपना काम शुरू कर दिया है। मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर के नेतृत्व में बनी इस टीम में मेरठ के मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अजय वर्मा शामिल हैं। दोपहर करीब 12 बजे यह टीम सबसे पहले नोएडा सेक्टर 6 स्थित विकास प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची और वहां से जांच की शुरुआत की। इसके बाद जांच समिति के सदस्यों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका दर्द साझा किया और बयान दर्ज किए।

एडीजी भानु भास्कर ने क्या कहा?

जांच प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए एसआईटी टीम के प्रमुख और एडीजी भानु भास्कर ने कहा कि “सभी पहलुओं पर जांच हो रही है. परिवार के साथ संवेदना है. परिवार से पूरी बात हुई है.”

सीएम योगी सख्त, सीईओ पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और जांच दल से पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। सरकार ने कड़ा संदेश देते हुए सोमवार को ही नोएडा विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया था और उन्हें प्रतीक्षारत (वेटिंग) सूची में डाल दिया है। फिलहाल, प्राधिकरण के सीईओ पद पर किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है।

सुरक्षा के अभाव में गई जान

यह पूरा मामला 16 जनवरी का है, जब नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की एक हादसे में मौत हो गई थी। उनकी कार एक निर्माणाधीन साइट के पास पानी से लबालब भरे गहरे गड्ढे में गिर गई थी। जांच में सामने आया है कि यह गड्ढा एक मॉल के अंडरग्राउंड लेवल के निर्माण के लिए खोदा गया था, लेकिन वहां सुरक्षा के लिए कोई भी अवरोधक या बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई थी। इसी लापरवाही के चलते एक होनहार इंजीनियर को अपनी जान गंवानी पड़ी।

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