नागपुर में रविवार, 6 जुलाई 2025 को आयोजित ‘बियॉन्ड बॉर्डर्स’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वैश्विक हालात पर चिंता जताते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया इस वक्त संघर्ष के बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है और ऐसे में कभी भी तीसरा विश्व युद्ध छिड़ सकता है।
“आम नागरिक हो रहे हैं युद्ध का निशाना”
गडकरी ने कहा कि मौजूदा युद्ध अब सिर्फ सेनाओं तक सीमित नहीं हैं।
“आज का युद्ध मिसाइल, ड्रोन और अत्याधुनिक तकनीक के जरिए लड़ा जा रहा है, जहां आम नागरिक सीधे निशाने पर हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि आज की लड़ाइयों में नैतिकता, सामाजिक शांति और मानवाधिकार सबसे बड़ा नुकसान उठा रहे हैं।
इजरायल-ईरान और रूस-यूक्रेन का उदाहरण देते हुए जताई आशंका
गडकरी ने अपने भाषण में मध्य-पूर्व में इजरायल-ईरान और यूरोप में रूस-यूक्रेन के बीच जारी तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और विश्व युद्ध जैसी परिस्थितियां कभी भी उत्पन्न हो सकती हैं।
महाशक्तियों की ‘तानाशाही मानसिकता’ पर हमला
गडकरी ने बड़ी महाशक्तियों की अधिनायकवादी प्रवृत्ति पर भी सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
“आज समन्वय, सद्भाव और प्रेम की भावना कमजोर पड़ रही है। युद्ध अब सिर्फ सैनिकों के बीच नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक मोर्चों पर भी लड़ा जा रहा है। ऐसे में मानवता की रक्षा दिन-ब-दिन कठिन होती जा रही है।”
“भारत शांति का मार्गदर्शक बने”
गडकरी ने भारत को गौतम बुद्ध की धरती बताते हुए कहा कि
“भारत ने हमेशा सत्य, अहिंसा और शांति का संदेश दिया है। हमें आज फिर से उसी भूमिका में लौटना होगा और वैश्विक स्तर पर शांति और समन्वय के प्रयासों का नेतृत्व करना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक तनावों को देखते हुए भारत को अपने रणनीतिक दृष्टिकोण की समीक्षा करनी चाहिए।
“अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में शांति की पहल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हमें सोचने की जरूरत है कि हमारी विदेश नीति मानवता की रक्षा में कैसे सहायक हो सकती है।”
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में आया बयान
गडकरी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सफल निष्पादन की खबरों ने देश भर में चर्चा बटोरी थी। ऐसे माहौल में गडकरी का यह वैश्विक चेतावनी भरा बयान भारत की रणनीतिक सोच और शांति के पक्ष में उसके रुख को स्पष्ट करता है।
गडकरी ने यह साफ संकेत दिया है कि दुनिया आज अत्यधिक संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है, और भारत को चाहिए कि वह अपनी विदेश नीति को इस दिशा में पुनर्परिभाषित करे, जहां शांति, समन्वय और मानवता की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले।