
भारत, चीन और रूस की सदस्यता वाले ब्रिक्स संगठन का विस्तार हो गया है। 1 जनवरी, 2024 से सऊदी अरब, ईरान समेत 6 नए देश इससे जुड़ जाएंगे और कुल सदस्यों की संख्या 11 हो जाएगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स समिट के दौरान इस विस्तार का स्वागत किया।इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें भारत की एंट्री के लिए फिर से दरवाजा खटखटाया। पीएम मोदी ने यूएनएससी को नसीहत भी दी और कहा कि बदलते समय की परिस्थितियों के साथ वैश्विक संस्थाओं को ढल जाना चाहिए।फिलहाल यूएनएससी का भारत सदस्य नहीं है और इसमें 5 ही देश स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल हैं। इसके अलावा अन्य 10 देश 2 साल के अस्थायी सदस्य रहते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स का विस्तार यह संदेश देता है कि बदलते वक्त की परिस्थितियों के अनुरूप वैश्विक संस्थाओं को ढलना चाहिए। यह ऐसी पहल है, जो 20वीं सदी में स्थापित अन्य वैश्विक संगठनों के लिए मिसाल बन सकता है। उन्होंने कहा कि हमने ब्रिक्स फोरम के विस्तार का फैसला लिया है। भारत का यह मत रहा है कि नए सदस्यों के जुड़ने से ब्रिक्स एक संगठन के रूप में मजबूत होगा और हमारे साझा प्रयासों को नई ताकत मिलेगी। इस कदम से विश्व के अनेक देशों का मल्टी पोलर वर्ल्ड ऑर्डर में भरोसा मजबूत होगा।
कुछ और देश बनेंगे ब्रिक्स का हिस्सा, PM मोदी ने दिया संकेत
ब्रिक्स के विस्तार पर पीएम मोदी ने कहा कि आज हम अर्जेंटीना, मिस्र, सऊदी अरब, ईरान, यूएई और इथियपिया का स्वागत करते हैं। मैं इन देशों के नेताओं और वहां के नागरिकों को ब्रिक्स में शामिल होने के लिए बधाई देता हूं। भारत के इन सभी देशों के साथ गहरे और ऐतिहासिक संबंध हैं। जिन अन्य देशों ने भी ब्रिक्स से जुड़ने की अभिलाषा व्यक्त की है, उन्हें भी पार्टनर देश बनाने की सहमति के लिए भारत प्रयास करेगा।
‘हमारा मंत्र तो हजारों सालों से वसुधैव कुटुम्बकम’
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्रयान मिशन का भी जिक्र किया और कहा कि यह बड़ी उपलब्धि भारत ने हासिल की है। उन्होंने कहा कि हमारा मंत्र तो हजारों सालों से वसुधैव कुटुम्बकम का रहा है। उन्होंने कहा कि लैटिन अमेरिका से लेकर सेंट्रल एशिया तक, पश्चिम एशिया से लेकर साउथ ईस्ट एशिया तक और इंडो पैसिफिक से लेकर इंडो अटलांटिक तक भारत सभी देशों को एक परिवार के रूप में देखता है। यह हमारी जी-20 की अध्यक्षता का भी मूल मंत्र है।