मेरठ। धर्मांतरण और पहचान छुपाकर धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के दादरी गांव से है, जहां एक युवक ने खुद को ‘कृष्ण’ बताकर प्राचीन शिव मंदिर में पुजारी की भूमिका निभाई, और करीब एक साल तक पूजा-पाठ करता रहा।
लेकिन हाल ही में एक विवाद के बाद उसकी असली पहचान ‘कासिम’ के रूप में सामने आई, जिससे गांव में हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों को बनाया मूर्ख, एक साल तक रहा मंदिर में
गांव के प्राचीन शिव मंदिर में पहले कोई पुजारी नहीं था। युवक ने खुद को कृष्ण बताते हुए मंदिर में रहने की अनुमति ली थी।
वह रोज सुबह-शाम पूजा-पाठ करता और गांववालों को आध्यात्मिक प्रवचन भी देता। ग्रामीणों ने उसे साधु मानकर आदर और विश्वास दिया।
पहचान पत्र मांगा तो हुआ लापता
कुछ महीनों बाद कुछ ग्रामीणों को उस पर शक हुआ और पहचान पत्र दिखाने को कहा,
तो वह अचानक 15 दिन के लिए गायब हो गया।
फिर लौटकर आया और पूजा दोबारा शुरू कर दी।
हाल ही में हस्तरेखा देखने को लेकर एक ग्रामीण से विवाद हुआ,
जिसके बाद वह मंदिर छोड़कर चला गया।
शिवरात्रि पर लौटकर चोरी का शक, फिर खुली सच्चाई
बुधवार को शिवरात्रि और कांवड़ यात्रा के अवसर पर मंदिर में भंडारा चल रहा था।
तभी ‘कृष्ण’ मंदिर पहुंचा और कमरे से कुछ सामान निकालने लगा।
ग्रामीणों को उस पर चोरी का शक हुआ, तो पूछताछ शुरू हुई।
बहस बढ़ने पर कुछ लोगों ने उसकी धोती खींच दी —
यहीं से उसका मुस्लिम होने का राज खुल गया।
असली नाम: कासिम पुत्र मोहम्मद अब्बास
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ में उसने बताया कि उसका असली नाम कासिम है,
पिता का नाम मोहम्मद अब्बास, और वह बिहार के सीतामढ़ी जिले के कोली रायपुर गांव का निवासी है।
उसने दावा किया कि:
- वह 20 साल पहले यूपी आया था
- दिल्ली के मंदिरों में रहकर पूजा-पाठ और मंत्र सीख लिया
- उसने हाथ पर ‘कृष्ण’ नाम भी गुदवा रखा है
- और कई वर्षों से संतों के साथ रहकर हिंदू धर्म अपनाया है
ग्रामीणों का आरोप – छुपाई पहचान, किया छल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि:
- उसने हमेशा अपनी असली पहचान छिपाई
- पुलिस सत्यापन में भी खुद को ‘कृष्ण’ बताया
- धार्मिक आस्थाओं से खिलवाड़ किया गया
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने आरोपी कासिम के खिलाफ धोखाधड़ी और धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज कर लिया है।
बिहार पुलिस को भी सूचना भेजी गई है और आगे की जांच की जा रही है।
यह मामला न सिर्फ धार्मिक पहचान छुपाकर रहने, बल्कि गांव के पूरे समुदाय को एक साल तक धोखे में रखने से जुड़ा है।
अब पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कासिम का इरादा सच में धर्म परिवर्तन का था या कुछ और।